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Tera Jalwa Noor-e-Khuda Ghous-e-Azam

Written by Mustafa Raza Khan Qadri

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तेरा जलवा नूर-ए-ख़ुदा ग़ौस-ए-आज़म तेरा चेहरा ईमां फ़ज़ा ग़ौस-ए-आज़म मुझे बे-गुमां दे गुमां ग़ौस-ए-आज़म न पाऊं में अपना पता ग़ौस-ए-आज़म ख़ुदी को मिटा दे ख़ुदा से मिला दे दे ऐसी फ़ना-ओ-बक़ा ग़ौस-ए-आज़म ख़ुदी को गुमाऊं तो में हक़ को पाऊं मुझे जाम-ए-इरफ़ान पिला ग़ौस-ए-आज़म ख़ुदा साज़ आईना-ए-हक़ नुमा है तेरा चेहरा पुर-ज़िया ग़ौस-ए-आज़म ख़ुदा तो नहीं है मगर तू ख़ुदा से जुदा भी नहीं है ज़रा ग़ौस-ए-आज़म न तो ख़ुद ख़ुदा है न हक़ से जुदा है ख़ुदा की है तू शान या ग़ौस-ए-आज़म तू बाग़-ए-अली का है वो फूल जिस से दिमाग़-ए-जहाँ बस गया ग़ौस-ए-आज़म तेरा मर्तबा क्यों न आला हो मौला है महबूब-ए-रब्ब-उल-उला ग़ौस-ए-आज़म तेरा रुतबा अल्लाह-हू-अकबर सरों पर क़दम औलिया ने लिया ग़ौस-ए-आज़म तेरा दामन-ए-पाक थामे जो रहज़न बने हादी-ओ-रहनुमा ग़ौस-ए-आज़म न क्यों मेहरबां हो ग़ुलामों पे अपने करम की है तू कान या ग़ौस-ए-आज़म तेरे सदक़े जाऊं मेरी लाज रख ले तेरे हाथ है लाज या ग़ौस-ए-आज़म परेशान कर दे परेशानियों को परेशान दिल है मेरा ग़ौस-ए-आज़म मेरी कश्ती चक्रा रही है भंवर में मेरे नाख़ुदा बाख़ुदा ग़ौस-ए-आज़म ख़ुदाया सहारा सहारा ख़ुदाया तलातुम है हद से सिवा ग़ौस-ए-आज़म अरे मोरे सियां परूं तोरे पियां पकड़ मोरी बियां पिया ग़ौस-ए-आज़म ख़ताएं हमारी जो हद से सिवा हैं अता तेरी उन से सिवा ग़ौस-ए-आज़म ख़ताकारियां गरचे हद से भी अपनी सिवा हैं सिवा हैं सिवा ग़ौस-ए-आज़म हमारी ख़ता को तुम्हारी अता से भला कोई निस्बत भी या ग़ौस-ए-आज़म तू रहम-ओ-करम का है बे-पायां दरिया ये इक फ़र्द-ए-इसयां है क्या ग़ौस-ए-आज़म ये इक फ़र्द-ए-इसयां है क्या तेरे आगे अगर लाखों से हों सिवा ग़ौस-ए-आज़म तेरा एक ही कतरा धो देगा सारा हर एक सफहा-ए-पुर-खता गौस-ए-आज़म तू बेकस का गुस और बे-बस का बस है तुवां नातवानों की या गौस-ए-आज़म मेरी जान में जान आए जो आए मरा आलम मरा गौस-ए-आज़म मेरी जान क्या जान-ए-ईमां हो ताज़ा के है मुहयी-ए-दीन-ए-खुदा गौस-ए-आज़म मरा सर तेरी कफ़श-ए-पा पर तसद्दुक़ वो पा के तू क़ाबिल है या गौस-ए-आज़म झलक रू-ए-अनवर की अपनी दिखा कर तू नूरी को नूरी बना गौस-ए-आज़म