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तू ने बातिल को मिटाया ऐ इमाम-ए-अहमद-ए-रज़ा

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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तू ने बातिल को मिटाया ऐ इमाम-ए-अहमद-ए-रज़ा दीन का डंका बजाया ऐ इमाम-ए-अहमद-ए-रज़ा ज़ोर-ए-बातिल का, ज़लालत का था जिस दम हिन्द में तू मुजद्दिद बन के आया ऐ इमाम-ए-अहमद-ए-रज़ा अहल-ए-सुन्नत का चमन सरसब्ज़ था शादाब था ताज़गी तू और लाया ऐ इमाम-ए-अहमद-ए-रज़ा तू ने बातिल को मिटा कर दीन को बख़्शी जला सुन्नतों को फिर जलाया ऐ इमाम-ए-अहमद-ए-रज़ा ऐ इमाम-ए-अहल-ए-सुन्नत नायब-ए-शाह-ए-उमम कीजिये हम पर भी साया ऐ इमाम-ए-अहमद-ए-रज़ा इल्म का चश्मा हुआ है मौजज़न तहरीर में जब क़लम तू ने उठाया ऐ इमाम-ए-अहमद-ए-रज़ा हश्र तक जारी रहे गा फ़ैज़-ए-मुर्शिद आप का फ़ैज़ का दरिया बहाया ऐ इमाम-ए-अहमद-ए-रज़ा है बदरगाह-ए-ख़ुदा अत्तार-ए-आजिज़ की दुआ तुझ पे रहमत का साया ऐ इमाम-ए-अहमद-ए-रज़ा