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उम्मतन व सियाह कारीहा

Written by Imam Ahmad Raza Khan Qadri

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उम्मतन व सियाह कारीहा शाफे-ए-हश्र ओ ग़म गुसारीहा दूर अज़ गो-ए-साहिब-ए-कौसर चश्म दारद चे अश्कबारीहा दर फ़िराक़-ए-तू या रसूल अल्लाह सीना दारद चे बे-क़रारीहा ज़ुल्मत-ए-आबाद-ए-गोर रोशन शुद दाग़-ए-दिल राश्त नूर बारीहा चे गुन्द नफ़्स पर्दा दर मौला चूं तूई गर्म-ए-पर्दा दारीहा सग-ए-गो-ए-नबी ओ यक नुकमे मन ओ ता हश्र जान निसारीहा सौफ़ा युअतीका रब्बुका फ़तरदा हक़ नुमुदत चे पासदारीहा दारम ऐ गुल बियाद-ए-ज़ुल्फ़ ओ रुख्त सहर ओ शाम आह ओ ज़ारीहा ता ज़े लुत्फ़-ए-तू बर रज़ा हर दम मरहम-ए-कोहना दिल फ़गारीहा