Home/Imam Ahmad Raza Khan Qadri/Wasl-e-Chaharam Isti'anat Az Sarkar-e-Ghaus-e-Pak Radi Allahu Ta'ala Anhu

वस्ल-ए-चहारुम इस्तआनत अज़ सरकार-ए-गौस-ए-पाक रदियल्लाहु तआला अन्हु

Written by Imam Ahmad Raza Khan Qadri

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तलब का मुँह तो किस काबिल है या गौस मगर तेरा करम कामिल है या गौस दुहाई या मुहियुद्दीन दुहाई बला इस्लाम पर नाज़िल है या गौस वो संगीन बिदअतें वो तेज़ी-ए-कुफ़्र के सर पर तेग़-ए-सलसल है या गौस अज़ूमन क़ातिलन इन्दल क़ितालि मदद को आ दम-ए-बिस्मिल है या गौस ख़ुदा रा नाख़ुदा आ दे सहारा हवा भँवर हाइल है या गौस जला दे दीन जला दे कुफ़्र ओ इलहाद के तू मुहयी है तू क़ातिल है या गौस तरा वक़्त और पड़े यूँ दीन पर वक़्त ना तू आजिज़ ना तू ग़ाफ़िल है या गौस रही हाँ शामत-ए-आमाल ये भी जो तू चाहे अभी ज़ाइल है या गौस ग़यूर! अपनी ग़ैरत का तसदुक़ वही कर जो तेरे क़ाबिल है या गौस ख़ुदा रा मरहम-ए-ख़ाक-ए-क़दम दे जिगर ज़ख़्मी है दिल घायल है या गौस ना देखूँ शक्ल-ए-मुश्किल तेरे आगे कोई मुश्किल सी ये मुश्किल है या गौस वो घेरा रिश्ता-ए-शर्क-ए-ख़फ़ी ने फँसा ज़ुन्नार में ये दिल है या गौस के तरसा ओ गब्र ओ अक़ताब ओ अबदाल ये महज़ इस्लाम का साइल है या गौस तू क़ुव्वत दे मैं तन्हा काम बिसयार बदन कमज़ोर दिल काहिल है या गौस अदुव्व-ए-बद-मज़हब वाले हासिद तू ही तन्हा का ज़ोर-ए-दिल है या गौस हसद से उनके सीने पाक कर दे के बदतर दिक़ से भी ये सिल है या गौस ग़िज़ा-ए-दिक्क यही ख़ूँ उस्तख़्वाँ गोश्त ये आतिश-ए-दीन की आकिल है या गौस दिया मुझ को उन्हें महरूम छोड़ा मिरा क्या जुर्म हक़ फ़ासिल है या गौस ख़ुदा से लें लड़ाई वो है मुअती नबी क़ासिम है तू मौसिल है या गौस अताएँ मुक़्तिदर ग़फ़्फ़ार की हैं अबस बंदों के दिल में ग़ुल है या गौस तेरे बाबा का फिर तेरा करम है ये मुँह वरना किसी क़ाबिल है या गौस भरन वाले तेरा झाला तो झाला तेरा छींटा मिरा ग़ासिल है या गौस सना मक़्सूद है अर्ज़-ए-ग़रज़ क्या ग़रज़ का आप तो काफ़िल है या गौस रज़ा का ख़ातिमा बिलख़ैर होगा तेरी रहमत अगर शामिल है या गौस