या शहंशाह-ए-उमम! चश्म-ए-करम
कीजिए आक़ा! करम चश्म-ए-करम
आ गया अब तो मदीना हो अता
क़ल्ब-ए-मुज़्तर आँख नम चश्म-ए-करम
ठोकरें दर दर की खाएँ कब तलक
या रसूल अल्लाह! हम चश्म-ए-करम
चाँद से चेहरे को चमकाते हुए
ख़्वाब में कर दो करम चश्म-ए-करम
फ़ालतू बातों की आदत दूर हो
या नबी मोहतरम! चश्म-ए-करम
नफ़्स का ज़ुन्नार तोड़ो जिस तरह
तोड़े काबे के सनम चश्म-ए-करम
करबला वालों का सदक़ा या नबी!
दूर हों रंज-ओ-अलम चश्म-ए-करम
वर्दे-लब हर दम दुरूद-ए-पाक हो
या शह-ए-अरब-ओ-अजम! चश्म-ए-करम
वास्ता आक़ा! ज़ियाउद्दीन का
अपना ग़म दो अपना ग़म चश्म-ए-करम
या नबी! ज़िक्र-ए-मदीना ही रहे
लब पे मेरे दम-ब-दम चश्म-ए-करम
मेरा सीना हो मदीना या नबी!
काश! हो ऐसा करम चश्म-ए-करम
गुम्बद-ए-ख़ज़रा के जलवे आँख में
जाएँ बस शाह-ए-हरम चश्म-ए-करम
या नबी! ”नेकी की दावत“ की तड़प
हो किसी सूरत ना कम चश्म-ए-करम
सारे दीवानों को तैबा लो बुला!
या रसूल-ए-मोहतरम! चश्म-ए-करम
मौत आए काश! तैबा में मुझे
अज़ पए ख़ाक-ए-हरम चश्म-ए-करम
दो बक़ी आक़ा अब तो बक़ी
हो करम आक़ा! करम चश्म-ए-करम
अब सरहाने आइए या मुस्तफ़ा!
टूटने वाला है दम चश्म-ए-करम
हश्र है नामा गुनाहों से है पुर
तुम ही अब रख लो भरम चश्म-ए-करम
लिख सके अत्तार नातें आप की
दीजिए! ऐसा क़लम चश्म-ए-करम