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या शहंशाह-ए-उमम चश्म-ए-करम

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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या शहंशाह-ए-उमम! चश्म-ए-करम कीजिए आक़ा! करम चश्म-ए-करम आ गया अब तो मदीना हो अता क़ल्ब-ए-मुज़्तर आँख नम चश्म-ए-करम ठोकरें दर दर की खाएँ कब तलक या रसूल अल्लाह! हम चश्म-ए-करम चाँद से चेहरे को चमकाते हुए ख़्वाब में कर दो करम चश्म-ए-करम फ़ालतू बातों की आदत दूर हो या नबी मोहतरम! चश्म-ए-करम नफ़्स का ज़ुन्नार तोड़ो जिस तरह तोड़े काबे के सनम चश्म-ए-करम करबला वालों का सदक़ा या नबी! दूर हों रंज-ओ-अलम चश्म-ए-करम वर्दे-लब हर दम दुरूद-ए-पाक हो या शह-ए-अरब-ओ-अजम! चश्म-ए-करम वास्ता आक़ा! ज़ियाउद्दीन का अपना ग़म दो अपना ग़म चश्म-ए-करम या नबी! ज़िक्र-ए-मदीना ही रहे लब पे मेरे दम-ब-दम चश्म-ए-करम मेरा सीना हो मदीना या नबी! काश! हो ऐसा करम चश्म-ए-करम गुम्बद-ए-ख़ज़रा के जलवे आँख में जाएँ बस शाह-ए-हरम चश्म-ए-करम या नबी! ”नेकी की दावत“ की तड़प हो किसी सूरत ना कम चश्म-ए-करम सारे दीवानों को तैबा लो बुला! या रसूल-ए-मोहतरम! चश्म-ए-करम मौत आए काश! तैबा में मुझे अज़ पए ख़ाक-ए-हरम चश्म-ए-करम दो बक़ी आक़ा अब तो बक़ी हो करम आक़ा! करम चश्म-ए-करम अब सरहाने आइए या मुस्तफ़ा! टूटने वाला है दम चश्म-ए-करम हश्र है नामा गुनाहों से है पुर तुम ही अब रख लो भरम चश्म-ए-करम लिख सके अत्तार नातें आप की दीजिए! ऐसा क़लम चश्म-ए-करम