Home/Imam Ahmad Raza Khan Qadri/Yaad-e-Watan Kya Dasht-e-Haram Se Layi Kyun

Yaad-e-Watan Kya Dasht-e-Haram Se Layi Kyun

Written by Imam Ahmad Raza Khan Qadri

100%
याद-ए-वतन क्या दश्त-ए-हरम से लाई क्यों बैठे बिठाए बद-नसीब सर पे बला उठाई क्यों दिल में तो चोट थी दबी हाय ग़ज़ब उभर गई पूछो तो आह-ए-सर्द से ठंडी हवा चलाई क्यों छोड़ के उस हरम को आप बन में ठगों के आबसो फिर कहो सर पे धर के हाथ लुट गई सब कमाई क्यों बाग़-ए-अरब का सर्व-ए-नाज़ देख लिया है वरना आज क़ुमरी-ए-जां ग़मज़दा गूँज के छुपाई क्यों नाम-ए-मदीना ले दिया चलने लगी नसीम-ए-खुल्द सोज़-ए-ग़म को हम ने भी कैसी हवा बताई क्यों किस की निगाह की हया फिरती है मेरी आँख में नर्गिस-ए-मस्त-ए-नाज़ ने मुझ से नज़र चुराई क्यों तू ने तो कर दिया तबीब-ए-आतिश-ए-सीना का इलाज आज के दूध-ए-आह में बू-ए-कबाब आई क्यों फ़िक्र-ए-मआश-ए-बद बला, होल-ए-मआद जाँ गुज़ा लाखों बला में फंसने को रूह-ए-बदन में आई क्यों हो न हो आज कुछ मेरा ज़िक्र-ए-हुज़ूर में हुआ वरना मेरी तरफ़ ख़ुशी देख के मुस्कुराई क्यों हूर-ए-जनां सितम किया तैबा नज़र में फिर गया छेड़ के पर्दा-ए-हिजाज़ देस की चीज़ गई क्यों ग़फ़लत-ए-शेख़-ओ-शाब पर हंसते हैं तिफ़्ल-ए-शीर ख़्वार करने को गुदगुदी अबस आने लगी बहाई क्यों अर्ज़ करूँ हुज़ूर से दिल की तो मेरे ख़ैर है पीटती सर को आरज़ू दश्त-ए-हरम से आई क्यों हसरत-ए-नौ का सानिहा सुनते ही दिल बिगड़ गया ऐसे मरीज़ को रज़ा मर्ग-ए-जवाँ सुनाई क्यों