ज़ेब-ए-मतला

Written by Imam Ahmad Raza Khan Qadri

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सर तूई सरवर तूई सरासर ओ सामां तूई जां तूई जानां तूई जां रा क़रार-ए-जां तूई ज़िल्ल-ए-ज़ाते किब्रिया ओ अक्स-ए-हुस्ने मुस्तफ़ा मुस्तफ़ा खुर्शीद ओ आं खुर्शीद रा लमआं तूई मन रअनी क़द रअल-हक़ गर बुगोया मी सज़द ज़ानके माह-ए-तैबा रा आईना-ए-ताबاں तूई बारक अल्लाह नौबहार-ए-लाला-ज़ार-ए-मुस्तफ़ा वह चे रंग अस्त इनके रंग-ए-रौज़ा-ए-रिज़वां तूई जोशद अज़ क़द-ए-तू सरो ओ बारद अज़ रू-ए-तू गुल खुश गुलस्ताने के बाशी तरफ़ा सरो-स्तां तूई आंके गोयंद औलिया रा हश्त क़ुदरत अज़ इलाह बाज़ गर्दानंद तीर अज़ नीम-ए-राह-ए-ईनां तूई अज़ तू मीरीम ओ ज़ीतेम ओ ऐश-ए-जाविदां कुनीम जां सितां जां बख्श जां परवर तूई दहां तूई गहना जाने दादह जाने चूं तू दर बर याफ़तीम वह के मां चंदां गिरां-एम ओ चुनीं अर्ज़ां तूई आलम-ए-उम्मी चे तालीमी अजीब अस्त औहश अल्लाह बर उलूम-ए-सर-ओ-ग़ैब दां तूई फ़ि तरक़्क़ियातिही रज़ियल्लाहु तआला अन्हु क़िबला गाह-ए-जां ओ दिल पाकी ज़ लौस-ए-आब-ओ-गिल रख्त बाला बर्दा अज़ मक़सूरा-ए-अरकां तूई शहसवार-ए-मन चे ताज़ी के दर गाम-ए-नखुस्त पाक बेरून ताख्ता ज़ीन साकिन ओ गर्दां तूई ता परी बख्शुदा अज़ अर्श-ए-बाला बूदा आं क़वी पर बाज़ अशहब साहिब-ए-तैरां तूई सालहा शुद ज़ीर-ए-मेहमेज़ अस्त अस्ब-ए-सालिक़ां ता अनान दर दस्त गीरी आं सू-ए-इमकां तूई फ़ि कौनिही रज़ियल्लाहु तआला अन्हु सिर्रन ला युद्राक ईन चे शक्ल अस्त इनके दारी तू के ज़िल्ल-ए-बर्तरी सूरते बिग्रेफ़्ता बर अंदाज़ा-ए-अक्वां तूई या मगर आईना अज़ ग़ैब ईं सू कर्दा रू-ए अक्स मी जोशद नुमायां दर नज़र ज़ नीसां तूई या मगर नौअ-ए-दीगर रा हम बशर नामीदा-अंद या तआला अल्लाह अज़ इंसां गर हमीं इंसां तूई फ़ि जामिअतिही रज़ियल्लाहु तआला अन्हु लिकमालत-ए-ज़ाहिर-वल-बातिन शरअ अज़ रुईयत चकद इरफ़ान ज़ पहलूयत दमेद हम बहार-ए-ईं गुल ओ हम अबर-ए-आं बारां तूई परदा बर्गीर अज़ रुखत ऐ मह के शरह-ए-मिल्लती रुख पोश ईजाद के रम्ज़-ए-बातिन-ए-क़ुरआं तूई हम तूई क़ुत्ब-ए-जनूब ओ हम तूई क़ुत्ब-ए-शुमाल ने ग़लत कर्दम मुहीट-ए-आलम-ए-इरफ़ान तूई साबित ओ सय्यारा हम दर तुस्त ओ अर्श-ए-आज़मी अहल-ए-तमकीन अहल-ए-तल्वीज-ए-जुमला रा सुल्तां तूई