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ज़ि अक्सत माह-ए-ताबान आफ़रीदन्द

Written by Imam Ahmad Raza Khan Qadri

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ज़ि अक्सत माह-ए-ताबान आफ़रीदन्द ज़ि बू-ए-तू गुलिस्तां आफ़रीदन्द न अज़ बहर-ए-तू सर्फ़-ए-ईमानियानन्द के ख़ुद बहर-ए-तू ईमान आफ़रीदन्द सबा रामस्त अज़ बू-ए-त बहर-ए-सू चुनां उफ़तां व ख़ेज़ां आफ़रीदन्द बराए जल्वा-ए-यक गुलबन-ए-नाज़ हज़ारां बाग़ व बुस्तां आफ़रीदन्द ज़ि मेहर-ए-तू मिसाले बर गिरफ़्तन्द व ज़ां मेहर-ए-सुलैमां आफ़रीदन्द चू अंगुश्त-ए-तू शुद जौलां देह-ए-बर्क़ क़मर रा बहर-ए-क़ुर्बां आफ़रीदन्द ज़ि लअल-ए-नोष-ए-ख़ंद-ए-जां फ़ज़ायित ज़लाल-ए-आब-ए-हैवां आफ़रीदन्द न ग़ैर-ए-किब्रिया जां आफ़रीने न ख़ुद मिस्ल-ए-तू जानां आफ़रीदन्द पै नज़ारा-ए-महबूब-ए-लाहूत जबीनत आईना सां आफ़रीदन्द बना करदन्द ता क़स्र-ए-रिसालत तरा शम्अ-ए-शबिस्तां आफ़रीदन्द ज़ि मेहर व चर्ख़ बहर-ए-ख़्वान-ए-जौदत अजब क़ुर्स व नमकदां आफ़रीदन्द ज़ि हुस्नत ता बहार-ए-ताज़ा गुल गर्द रज़ायत रा ग़ूल ख़्वां आफ़रीदन्द