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आह अब वक़्त-ए-रुख़सत है आया अलविदा आह शाह-ए-मदीना

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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आह अब वक़्त-ए-रुख़सत है आया, अलविदा आह शाह-ए-मदीना सदमा-ए-हज्र कैसे सहूँ गा, अलविदा आह शाह-ए-मदीना बे-क़रारी बढ़ी जा रही है, हज्र की अब घड़ी आ रही है दिल हुआ जाता है पारा पारा, अलविदा आह शाह-ए-मदीना किस तरह शौक़ से मैं चला था, दिल का ग़ुन्चा ख़ुशी से खिला था आह! अब छूटता है मदीना, अलविदा आह शाह-ए-मदीना कूये जानाँ की रंगीन फ़ज़ाओ! ऐ मुअत्तर मुअत्तर हवाओ! लो सलाम-ए-आख़िरी अब हमारा, अलविदा आह शाह-ए-मदीना काश! क़िस्मत मेरा साथ देती, मौत भी यावरी मेरी करती जान क़दमों पे क़ुर्बान करता, अलविदा आह शाह-ए-मदीना सोज़-ए-उल्फत से जलता रहूँ मैं, इश्क़ में तेरे घुलता रहूँ मैं चाहे दीवाना समझे ज़माना, अलविदा आह शाह-ए-मदीना मैं जहाँ भी रहूँ मेरे आक़ा! हो नज़र में मदीने का जलवा इल्तिजा मेरी मक़बूल फ़रमा, अलविदा आह शाह-ए-मदीना कुछ न हुस्न-ए-अमल कर सका हूँ, नज़्र चन्द अश्क मैं कर रहा हूँ बस यही है मेरा कुल् असासा, अलविदा आह शाह-ए-मदीना आँख से अब हुआ ख़ून जारी, रूह पर भी हुआ रन्ज तारी जल्द अत्तार को फिर बुलाना, अलविदा आह शाह-ए-मदीना