आह अब वक़्त-ए-रुख़सत है आया, अलविदा आह शाह-ए-मदीना
सदमा-ए-हज्र कैसे सहूँ गा, अलविदा आह शाह-ए-मदीना
बे-क़रारी बढ़ी जा रही है, हज्र की अब घड़ी आ रही है
दिल हुआ जाता है पारा पारा, अलविदा आह शाह-ए-मदीना
किस तरह शौक़ से मैं चला था, दिल का ग़ुन्चा ख़ुशी से खिला था
आह! अब छूटता है मदीना, अलविदा आह शाह-ए-मदीना
कूये जानाँ की रंगीन फ़ज़ाओ! ऐ मुअत्तर मुअत्तर हवाओ!
लो सलाम-ए-आख़िरी अब हमारा, अलविदा आह शाह-ए-मदीना
काश! क़िस्मत मेरा साथ देती, मौत भी यावरी मेरी करती
जान क़दमों पे क़ुर्बान करता, अलविदा आह शाह-ए-मदीना
सोज़-ए-उल्फत से जलता रहूँ मैं, इश्क़ में तेरे घुलता रहूँ मैं
चाहे दीवाना समझे ज़माना, अलविदा आह शाह-ए-मदीना
मैं जहाँ भी रहूँ मेरे आक़ा! हो नज़र में मदीने का जलवा
इल्तिजा मेरी मक़बूल फ़रमा, अलविदा आह शाह-ए-मदीना
कुछ न हुस्न-ए-अमल कर सका हूँ, नज़्र चन्द अश्क मैं कर रहा हूँ
बस यही है मेरा कुल् असासा, अलविदा आह शाह-ए-मदीना
आँख से अब हुआ ख़ून जारी, रूह पर भी हुआ रन्ज तारी
जल्द अत्तार को फिर बुलाना, अलविदा आह शाह-ए-मदीना