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आईना मुनफ़इल तेरे जलवे के सामने

Written by Maulana Muhammad Jamil-ur-Rehman Razvi

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आईना मुनफ़इल तेरे जलवे के सामने साजिद हैं मेहर ओ मह तेरे तलवे के सामने जारी है हुक्म यह के दो पारा क़मर हुआ अंगुश्त-ए-मुस्तफ़ा के इशारे के सामने क्यों दर-ब-दर फकीर तुम्हारा करे सवाल जब तुम हो भीक मांगने वाले के सामने यह वह करीम हैं के जो मांगो वही मिले उसे साइल ओ चलो तो दुआ ले के सामने मंगता की अर्ज़ शाह-ए-मदीना क़बूल हो तुर्बत बनी हो आप के रौज़े के सामने