आओ मदनी क़ाफ़िले में हम करें मिल कर सफ़र
सुन्नतें सीखेंगे इस में इनशा अल्लाह सर-ब-सर
तीन तीन और बारह बारह दिन के मदनी क़ाफ़िले
में सफ़र करते रहो जब भी तुम्हें मौक़ा मिले
मुझ को जज़्बा दे सफ़र करता रहूँ परवरदिगार
सुन्नतों की तरबियत के क़ाफ़िले में बार बार
झूट ग़ीबत और चुग़ली से जो बचना चाहे वो
ख़ूब मदनी क़ाफ़िलों में दिल लगा जाए वो
जो भी शैदाई है मदनी क़ाफ़िलों का या ख़ुदा
दो जहान में उस का बेड़ा पार फ़र्मा या ख़ुदा
तीन दिन हर माह जो अपनाए मदनी क़ाफ़िला
बे हिसाब उस का ख़ुदाया! ख़ुल्द में हो दाख़िला
तू वली अपना बना ले उस को रब्बि लम यज़ल
"मदनी इनआमात" पर करता है जो कोई अमल
जो गुनाहों के मरज़ से तंग है बेज़ार है
क़ाफ़िला-ए-अत्तार उस के वास्ते तैयार है