Home/Muhammad Ilyas Attar Qadri/Aashiq-e-Mustafa Zia-ud-Din

Aashiq-e-Mustafa Zia-ud-Din

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

100%
आशिक-ए-मुस्तफा ज़ियाउद्दीन ज़ाहिद-ओ-पारसा ज़ियाउद्दीन दिलकश-ओ-दिलकुशा ज़ियाउद्दीन मेरे दिल की ज़िया, ज़ियाउद्दीन तुम को कुतुब-ए-मदीना या मुर्शिद! उलमा ने कहा ज़ियाउद्दीन यह शरफ़ कम नहीं है मेरे लिए हूँ मुरीद आपका ज़ियाउद्दीन मुझ को अपना बनाओ दीवाना वास्ता गौस का ज़ियाउद्दीन चश्म-ए-रहमत बनोये मन मुर्शिद! अज़ तुफ़ैल-ए-रज़ा ज़ियाउद्दीन ऐसा कर दे करम रहें या रब! मुझ से राज़ी सदा ज़ियाउद्दीन कैसे भटकूँगा मेरे हैं मेरे रहबर-ओ-रहनुमा ज़ियाउद्दीन एक मुद्दत से आँख प्यासी है अपना जलवा दिखा ज़ियाउद्दीन मर्ज़-ए-इसयाँ से नीम जाँ हूँ मैं मुझ को दीद-ओ-शिफ़ा ज़ियाउद्दीन चश्म-ए-तर और क़ल्ब-ए-मुज़्तर दो सदक़ा हसनैन का ज़ियाउद्दीन मेरी सब मुश्किलें हों हल मुर्शिद मेरे मुश्किल कुशा ज़ियाउद्दीन पौन सौ साल तक मदीने में तुम ने बानी ज़िया, ज़ियाउद्दीन जाम-ए-इश्क़-ए-नबी पिला के मुझे मस्त-ओ-बेखुद बना ज़ियाउद्दीन मेरे दुश्मन हैं ख़ून के प्यासे मुझ को उन से बचा ज़ियाउद्दीन आह! तूफ़ान में है घिरी नैया ऐ मेरे नाख़ुदा ज़ियाउद्दीन मौत आए मुझे मदीने में कर दो हक़ से दुआ ज़ियाउद्दीन मुझ को दीद-ए-बक़ी-ए-ग़रक़द में अपने क़दमों में जा ज़ियाउद्दीन हश्र में देख कर पुकारूँगा मरहबा मरहबा ज़ियाउद्दीन मुस्तफ़ा का पड़ोस जन्नत में मुझ को हक़ से दिला ज़ियाउद्दीन बे-अमल ही सही मगर अत्तार किस का है? आपका ज़ियाउद्दीन