आशिक-ए-मुस्तफा ज़ियाउद्दीन
ज़ाहिद-ओ-पारसा ज़ियाउद्दीन
दिलकश-ओ-दिलकुशा ज़ियाउद्दीन
मेरे दिल की ज़िया, ज़ियाउद्दीन
तुम को कुतुब-ए-मदीना या मुर्शिद!
उलमा ने कहा ज़ियाउद्दीन
यह शरफ़ कम नहीं है मेरे लिए
हूँ मुरीद आपका ज़ियाउद्दीन
मुझ को अपना बनाओ दीवाना
वास्ता गौस का ज़ियाउद्दीन
चश्म-ए-रहमत बनोये मन मुर्शिद!
अज़ तुफ़ैल-ए-रज़ा ज़ियाउद्दीन
ऐसा कर दे करम रहें या रब!
मुझ से राज़ी सदा ज़ियाउद्दीन
कैसे भटकूँगा मेरे हैं मेरे
रहबर-ओ-रहनुमा ज़ियाउद्दीन
एक मुद्दत से आँख प्यासी है
अपना जलवा दिखा ज़ियाउद्दीन
मर्ज़-ए-इसयाँ से नीम जाँ हूँ मैं
मुझ को दीद-ओ-शिफ़ा ज़ियाउद्दीन
चश्म-ए-तर और क़ल्ब-ए-मुज़्तर दो
सदक़ा हसनैन का ज़ियाउद्दीन
मेरी सब मुश्किलें हों हल मुर्शिद
मेरे मुश्किल कुशा ज़ियाउद्दीन
पौन सौ साल तक मदीने में तुम ने बानी ज़िया, ज़ियाउद्दीन
जाम-ए-इश्क़-ए-नबी पिला के मुझे मस्त-ओ-बेखुद बना ज़ियाउद्दीन
मेरे दुश्मन हैं ख़ून के प्यासे मुझ को उन से बचा ज़ियाउद्दीन
आह! तूफ़ान में है घिरी नैया ऐ मेरे नाख़ुदा ज़ियाउद्दीन
मौत आए मुझे मदीने में कर दो हक़ से दुआ ज़ियाउद्दीन
मुझ को दीद-ए-बक़ी-ए-ग़रक़द में अपने क़दमों में जा ज़ियाउद्दीन
हश्र में देख कर पुकारूँगा मरहबा मरहबा ज़ियाउद्दीन
मुस्तफ़ा का पड़ोस जन्नत में मुझ को हक़ से दिला ज़ियाउद्दीन
बे-अमल ही सही मगर अत्तार
किस का है? आपका ज़ियाउद्दीन