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Aayen Ge Suntain Jayen Gi Shamatein, Deeni Mahol Mein Kar Lo Tum Aitikaaf

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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(यह बाक़ायदा नज़्म नहीं, फ़ैज़ान-ए-सुन्नत जिल्द अव्वल के बाब "फ़ैज़ान-ए-रमज़ान" के जुज़व फ़ैज़ान-ए-एतिकाफ़ की मुख़्तलिफ़ मदनी बहारों वगैरह के आख़िर में लिखे हुए अशआर कहीं कहीं तरमीम के साथ यकजा किए गए हैं) आएंगे सुन्नतें जाएंगी शामतें, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ तुम सुधर जाओगे, पाओगे बरकतें, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ जलवा-ए-यार की आरज़ू है अगर, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ बैठे आक़ा करेंगे करम की नज़र, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ मर्ज़-ए-इसयां से छुटकारा चाहो अगर, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ आओ आओ इधर आओ, जाओ न उधर, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ चोट खा जाएगा एक न एक रोज़ दिल, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ फ़ज़्ल-ए-रब से हिदायत भी जाएगी मिल, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ फ़ज़्ल-ए-रब से गुनाहों की कालक धुले, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ नेकियों का तुम्हें ख़ूब जज़्बा मिले, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ गरचे दिल में है फ़ैशन की उल्फ़त भरी, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ उम्र-ए-आइंदा गुज़रेगी सुन्नत भरी, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ भाई गर चाहते हो नमाज़ें पढ़ो, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ नेकियों में तमन्ना है आगे बढ़ूँ, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ तुम को राहत की नेमत अगर चाहिये, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ बंदगी की भी लज़्ज़त अगर चाहिये, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ मौत फ़ज़्ल-ए-ख़ुदा से हो ईमान पर, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ रब की रहमत से जन्नत में पाओगे घर, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ रहमतें लूटने के लिये आओ तुम, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ सुन्नतें सीखने के लिये आओ तुम, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ गर तमन्ना है आक़ा के दीदार की, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ होगी मीठी नज़र तुम पे सरकार की, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ आओ आ कर गुनाहों से तौबा करो, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ रहमत-ए-हक़ से दामन तुम आ कर भरो, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ ख़त्म होगी शरारत की आदत चलो, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ दूर होगी गुनाहों की शामत चलो, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ बिगड़े अख़लाक़ सारे सँवर जायेंगे, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ बस मज़ा क्या मज़े को मज़े आयेंगे, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ वल्वला दीन की तब्लीग़ का पाओगे, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ फ़ज़्ल-ए-रब से ज़माने पे छा जाओगे, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ हुब्ब-ए-दुनिया से दिल पाक हो जायेगा, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ जाम-ए-इश्क़-ए-मुहम्मद भी हाथ आयेगा, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ सुन्नतें खाने खाने की तुम जान लो, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ मान लो बात अब तो मरी मान लो, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ लेने ख़ैरात तुम रहमतों की चलो, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ लूटने बरकतें सुन्नतों की चलो, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ प्यारे इस्लामी भाई चले आओ तुम, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ ख़ाली दामन मुरादों से भर जाओ तुम, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ मीठे आक़ा की उल्फ़त का जज़्बा मिले, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ दाढ़ी रखने की सुन्नत का जज़्बा मिले, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ इन्शा अल्लाह हर काम होगा भला, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ दूर होगी बफ़ज़्ल-ए-ख़ुदा हर बला, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ सीखने को मिलेंगी तुम्हें सुन्नतें, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ लूट लो आ कर अल्लाह की रहमतें, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ गीत गाने की आदत निकल जायेगी, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ बे-जा बक-बक की ख़सलत भी टल जायेगी, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ सारी फ़ैशन की मस्ती उतर जायेगी, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ ज़िंदगी सुन्नतों से निखर जायेगी, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ गर मदीने का ग़म चश्म-ए-नम चाहिये, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ मदनी आक़ा की नज़र-ए-करम चाहिये, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ सुन्नतें सीख लो रहमतें लूट लो, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ दीन के इल्म की बरकतें लूट लो, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ तुम गुनाहों से अपने जो बेज़ार हो, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ तुम पे फ़ज़्ल-ए-ख़ुदा, लुत्फ़-ए-सरकार हो, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ ज़िक्र करना ख़ुदा का यहाँ सुबह-ओ-शाम, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ पाओगे नात-ए-महबूब की धूम धाम, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ कर के हिम्मत मुसलमानो आ जाओ तुम, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ उख़रवी दौलत आओ कमा जाओ तुम, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ दर्द टांगों में हो, दर्द घुटनों में हो, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ पेट में दर्द हो या कि टख़नों में हो, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ सुन्नतों की तुम आ कर सौग़ात लो, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ आओ बँटती है रहमत की ख़ैरात लो, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ गोर-ए-तीरा को तुम जगमगाने चलो, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ राहतें रोज़-ए-महशर की पाने चलो, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ छूट जायेगी फ़िल्मों ड्रामों की लत, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ ख़ुश ख़ुदा होगा बन जायेगी आख़िरत, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ तंग दस्ती का हल भी निकल आयेगा, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ रोज़गार इन्शा अल्लाह मिल जायेगा, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ आशिक़ान-ए-रसूल आओ देंगे बयाँ, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ दूर होंगी इबादत की ख़ामियाँ, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ बा-जमात नमाज़ों का जज़्बा मिले, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ दिल का पुर्मर्दा ग़ुंचा ख़ुशी से खुले, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ सीखने ज़िंदगी का क़रीना चलो, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ देखना है जो मीठा मदीना चलो, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ इन्शा अल्लाह भाई सुधर जाओगे, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ मरज़-ए-इसियाँ से छुटकारा तुम पाओगे, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ दिल में बस जायें आक़ा के जलवे मुदाम, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ देखो मक्के मदीने के तुम सुबह-ओ-शाम, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ सोहबत-ए-बद में रहने की आदत छूटे, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ ख़सलत-ए-जुर्म-ओ-इसियाँ तुम्हारी मिटे, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ आओ इश्क़-ए-मुहम्मद के पीने को जाम, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ मस्त हो कर करो तुम मदनी काम, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ ज़िंदगी का क़रीना मिलेगा तुम्हें, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ आओ दर्द-ए-मदीना मिलेगा तुम्हें, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ आओ सुन्नत का फ़ैज़ान पाओगे तुम, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ इन शा अल्लाह जन्नत में जाओगे तुम, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ तुम को तड़पा के रख दे गो दर्द-ए-कमर, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ पाओगे तुम सुकून होगा ठंडा जिगर, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ रंग रलियाँ मनाने का चसका मिटे, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ रक़्स की महफ़िलों की नहूसत छूटे, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ ढोल बाजों को सुनने से बाज़ आओ तुम, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ फ़िल्मी गाने न हरगिज़ कभी गाओ तुम, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ छोड़ दो छोड़ दो भाई रिज़्क़-ए-हराम, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ आओ करने लगोगे बहुत नेक काम, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ फ़ज़्ल-ए-रब से हो दीदार-ए-सुल्तान-ए-दीं, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ शादमानी से झूमेगा क़ल्ब-ए-हज़ीं, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ मान भी जाओ अत्तार की इल्तिजा दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़ होगा राज़ी ख़ुदा ख़ुश शह-ए-अंबिया, दीनी माहौल में कर लो तुम एतिकाफ़