Home/Muhammad Ilyas Attar Qadri/Ab karam Ya Mustafa farmayiye

अब करम या मुस्तफ़ा फरमाइए

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

100%
अब करम या मुस्तफ़ा फरमाइए, इज़्न-ए-तैयबा का अता फरमाइए या हबीब-ए-किबरिया हज का शरफ़, अब अता इक मर्तबा फरमाइए हाज़िरी की अब सआदत पाऊँ मैं, कुछ करम ऐसा शहा फरमाइए ख़्वाब में आकर कुछ शिरीं कलाम, बैठ कर मीठे मुस्तफ़ा फरमाइए जिन पे सदक़े जाएं सब जन्नत के फूल, उन लबों को अब तो वा फरमाइए या रसूल अल्लाह मेरी मग़फ़िरत, हो ख़ुदा से ये दुआ फरमाइए इस्तिक़ामत दीन पर हम को अता, अज़ पए ग़ौस-ओ-रज़ा फरमाइए कब तलक तड़पें असीरान-ए-क़फ़स, क़ैद-ए-ग़म से अब रहा फरमाइए आप की उल्फ़त में हो रोना नसीब, मुझ को चश्म-ए-नम अता फरमाइए दूरी प्यारे मुस्तफ़ा रंज-ओ-बला, अज़ तुफ़ैल-ए-मुर्तज़ा फरमाइए आप के क़दमों में हो जाऊँ शहीद, कुछ सबब ऐसा शहा फरमाइए मुझ को लिल्लाह इक छलकता साक़िया, जाम-ए-कौसर का अता फरमाइए अपने आसी की शफ़ाअत हश्र में, शाफ़े-ए-रोज़-ए-जज़ा फरमाइए मदनी बुरक़े पहनें सब बहनें, करम फ़ातिमा का वास्ता फरमाइए माह-ए-मीलाद आ गया घर घर पे अब, नसब परचम सब हरा फरमाइए