अचानक दुश्मनों ने की चढ़ाई या रसूल अल्लाह
हुए दो जां बहक़ इस्लामी भाई या रसूल अल्लाह
मरा दुश्मन तो मुझ को ख़त्म करने आ ही पहुँचा था
मैं क़ुरबान तुम ने मेरी जां बचाई या रसूल अल्लाह
शहीद-ए-दावत-ए-इस्लामी सज्जाद ओ अहद आक़ा
रहें जन्नत में यकजा दोनों भाई या रसूल अल्लाह
अदू झुक मारता है ख़ाक उड़ाता है तेरे क़ुरबान
मुझे अब तक न कोई आंच आई या रसूल अल्लाह
नहीं सरकार! ज़ाती दुश्मनी मेरी किसी से भी
बुरी है नफ़्स ओ शैतां से लड़ाई या रसूल अल्लाह
शहा! दुश्मन हुआ हाय! हमारे ख़ून का प्यासा
दुहाई या रसूल अल्लाह! दुहाई या रसूल अल्लाह
हिफ़ाज़त दुश्मनों से आप ही फ़रमाइए आक़ा
कि मुझ कमज़ोर पर की है चढ़ाई या रसूल अल्लाह
मुक़ाबिल दुश्मन-ए-इस्लाम के ऐसा बना गोया
कोई दीवार हो सीसा पिलाई या रसूल अल्लाह
तही है जुर्म मेरा सुन्नतों का अदना ख़ादिम हूँ
है मैं ने सुन्नतों से लो लगाई या रसूल अल्लाह
अगर चे लाख दुश्मन धमकियां दे जान लेने की
किसी से क्यों डरे तेरा फ़दाई या रसूल अल्लाह
अगर चे जान जाए ख़िदमत-ए-सुन्नत न छोड़ूँगा
शहा! करते रहें मुश्किल कुशाई या रसूल अल्लाह
किसी सूरत भटक सकता नहीं मैं राह-ए-सुन्नत से
मुझे हासिल है तेरी रहनुमाई या रसूल अल्लाह
हिदायत दुश्मनों को या नबी! ऐसी अता कर दो
ये बन जाएं मेरे इस्लामी भाई या रसूल अल्लाह
तमन्ना है मेरे दुश्मन करें तौबा अता कर दो
उन्हें दोनों जहां की तुम भलाई या रसूल अल्लाह
बचालो! नार-ए-दोज़ख़ से बेचारे हासिदों को भी
मैं क्यों चाहूं किसी की भी बुराई या रसूल अल्लाह
हुक़ूक़ अपने किए हैं दरगुज़र दुश्मन को भी सारे
अगर चे मुझ पे हो गोली चलाई या रसूल अल्लाह
बहर-सूरत मुझे मरना पड़ेगा पर सआदत है
शहादत राह-ए-सुन्नत में जो पाई या रसूल अल्लाह
अंधेरी क़ब्र से शाह-ए-मदीना ख़ौफ़ आता है
नज़र में है रहमत पर जमाई या रसूल अल्लाह
तमन्ना है तेरे अत्तार की यूं धूम मच जाए
मदीने में शहादत इस ने पाई या रसूल अल्लाह