Home/Muhammad Ilyas Attar Qadri/Afsos! Bohat door hoon Gulzar-e-Nabi se

अफ़सोस! बहुत दूर हूँ गुलज़ार-ए-नबी से

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

100%
अफ़सोस! बहुत दूर हूँ गुलज़ार-ए-नबी से काश आए बुलावा मुझे दरबार-ए-नबी से उल्फत है मुझे गेसू-ए-ख़ुमदार-ए-नबी से अबरू ओ पलक आँख से रुख़सार-ए-नबी से पैराहन ओ चादर से असा से मोहब्बत नअलैन-ए-शरीफ़ैन से दस्तार-ए-नबी से बूसीरी! मुबारक हो तुम्हें बू-ए-यमानी सौगात मिली खूब है दरबार-ए-नबी से बीमार! न मायूस हो तू हुस्न-ए-यक़ीन रख दम जा के कराले किसी बीमार-ए-नबी से तू ख्वाब में हसनैन के सदक़े में खुदाया फ़रमा दे मुशर्रफ़ मुझे दीदार-ए-नबी से