सवाल: ये शेर दुरुस्त है या नहीं?
अर्श-ए-आज़म पे रब सब्ज़ गुंबद में तुम क्यों कहूँ मेरा कोई सहारा नहीं
मैं मदीने से लेकिन बहुत दूर हूँ ये खलिश मेरे दिल को गवारा नहीं
जवाब: इस शेर के इब्तिदाई अल्फ़ाज़: "अर्श-ए-आज़म पे रब अज़्ज़ा-व-जल" में बज़ाहिर मआज़ अल्लाह अज़्ज़ा-व-जल अर्श-ए-आज़म पर अल्लाह अज़्ज़ा-व-जल का मकान माना गया है और अल्लाह अज़्ज़ा-व-जल के लिए मकान मानना कुफ़्र-ए-लज़ूमी है। अगर इस शेर की इब्तिदा में "अर्श-ए-आज़म का रब अज़्ज़ा-व-जल" पढ़ें तो शेर शरई गिरफ़्त से निकल जाएगा।