अर्श-ए-उला से आला मीठे नबी का रौज़ा
है हर मकाँ से बाला मीठे नबी का रौज़ा
कैसा है प्यारा प्यारा ये सब्ज़ सब्ज़ गुम्बद
कितना है मीठा मीठा मीठे नबी का रौज़ा
फ़िरदौस की बुलंदी भी छू सके न इस को
ख़ुल्द-ए-बरीं से ऊँचा मीठे नबी का रौज़ा
मक्के से इस लिए भी अफ़ज़ल हुआ मदीना
हिस्से में इस के आया मीठे नबी का रौज़ा
काबे की अज़मतों का मुनकिर नहीं हूँ लेकिन
काबे का भी काबा मीठे नबी का रौज़ा
आँसू छलक पड़े और बेताब हो गया दिल
जिस वक़्त मैं ने देखा मीठे नबी का रौज़ा
होगी शफ़ाअत उस की जिस ने मदीने आकर
ख्वाह एक नज़र भी देखा मीठे नबी का रौज़ा
बादल घेरे हुए हैं बारिश बरस रही है
लगता है क्या सुहाना मीठे नबी का रौज़ा
हिज्र-ओ-फ़िराक़ में जो या रब! तड़प रहे हैं
उन को दिखा दे मौला मीठे नबी का रौज़ा
हिशदा-ए-हज़ार-ए-आलम का हुस्न इस पे क़ुर्बान
दोनों जहान का दूल्हा मीठे नबी का रौज़ा
उस आँख पे क्यों न क़ुर्बान मेरी जाँ हो
जिस आँख ने है देखा मीठे नबी का रौज़ा
जिस वक़्त रूह-ए-तन से अत्तार की जुदा हो
हो सामने ख़ुदाया मीठे नबी का रौज़ा