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Atta kar do madine ki ijazat Ya Rasool Allah

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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(मदनी मुन्नों और तलबा के लिए कलाम) अता कर दो मदीने की इजाज़त या रसूल अल्लाह करूं मैं सब्ज़ गुम्बद की ज़ियारत या रसूल अल्लाह कुछ ऐसा हो करम माह-ए-रिसालत या रसूल अल्लाह करूं अल्लाह की दिल से इबादत या रसूल अल्लाह सहाबा का गदा हूँ और अहले-बैत का खादिम यह सब है आप ही की तो इनायत या रसूल अल्लाह तुम्हारा फ़ज़ल है जो मैं ग़ुलाम-ए-गौस-ओ-ख़्वाजा हूँ न हो कम औलिया की दिल से उल्फ़त या रसूल अल्लाह उसी अहमद-ए-रज़ा का वास्ता जो मेरे मुर्शिद हैं अता कर दो मुझे अपनी मोहब्बत या रसूल अल्लाह मदीना मीठा मीठा है मदीना प्यारा प्यारा है मदीने से मुझे बे-हद है उल्फ़त या रसूल अल्लाह मैं हूँ सुन्नी रहूँ सुन्नी मरूँ सुन्नी मदीने में बक़ी-ए-पाक में बन जाए तुर्बत या रसूल अल्लाह नमाज़ों में मुझे हरगिज़ न हो सुस्ती कभी आका पढ़ूँ पाँचों नमाज़ें बा-जमाअत या रसूल अल्लाह बड़े भाई बहन का मैं कहा माना करूँ हर दम करूँ माँ बाप की दिन रात खिदमत या रसूल अल्लाह बड़े जितने भी हैं घर में अदब करता रहूँ सब का करूँ छोटे बहन भाई पे शफ़क़त या रसूल अल्लाह मैं सब से 'आप' कह कर प्यार से बातें करूँ आका झिड़कने की हो मेरी दूर आदत या रसूल अल्लाह अदब उस्ताद-ए-दीनी का मुझे आका अता कर दो दिल-ओ-जाँ से करूँ उनकी इताअत या रसूल अल्लाह करम कर दो कि मेरा हाफ़िज़ मज़बूत हो जाए न हो उस्ताद को मुझ से शिकायत या रसूल अल्लाह मैं गाने बाजों और फ़िल्मों ड्रामों के गुनाह छोड़ूँ पढ़ूँ नातें करूँ अक्सर तिलावत या रसूल अल्लाह हसद, वादा खिलाफ़ी, झूठ, चुगली, ग़ीबत-ओ-तौमत मुझे इन सब गुनाहों से हो नफ़रत या रसूल अल्लाह मरे अख़लाक़ अच्छे हों मरे सब काम अच्छे हों बना दो मुझ को तुम पाबंद-ए-सुन्नत या रसूल अल्लाह ज़रूरत से ज़्यादा माल-ओ-दौलत का नहीं तालिब रहे बस आप की नज़र-ए-इनायत या रसूल अल्लाह रहें सब शाद घर वाले शहा थोड़ी सी रोज़ी पर अता हो दौलत-ए-सबर-ओ-क़नाअत या रसूल अल्लाह सब अहल-ए-हशर महशर में उन्हीं को ढूँढते होंगे पुकारेंगे सभी रोज़-ए-क़यामत या रसूल अल्लाह बहुत कमज़ोर हूँ क़ाबिल नहीं हरगिज़ अज़ाबों के ख़ुदारा थाम लेते जाना जन्नत या रसूल अल्लाह मुझे तुम या रसूल अल्लाह दे दो जज़्बा-ए-तबलीग़ शहा! देता फिरूँ नेकी की दावत या रसूल अल्लाह शहा! अत्तार पर हर आन रहमत-ए-नज़र रखना करे दिन रात यह सुन्नत की खिदमत या रसूल अल्लाह करूँ हर आन में तेरी इताअत या रसूल अल्लाह पए मुर्शिद बना दे नेक सीरत या रसूल अल्लाह अंधेरी क़ब्र है और हाय! मैं बिल्कुल अकेला हूँ अब आ भी जाओ ऐ मेहर-ए-रिसालत! या रसूल अल्लाह बक़ी-ए-पाक में सो जाऊँ मैं आराम से ऐ काश! मयस्सर आएगी यूँ तेरी क़ुर्बत या रसूल अल्लाह अज़ाब-ए-क़ब्र ओ महशर से बचा लो नार-ए-दोज़ख़ से ख़ुदारा साथ ले के जाओ जन्नत या रसूल अल्लाह जो गुस्सा नफ़्स की ख़ातिर मुझे आ भी आए मिले सब्र ओ शकीबाई की दौलत या रसूल अल्लाह मुझे रंज ओ अलम ने हर तरफ से घेर रखा है दुखी दिल को करम से दीद-ए-राहत या रसूल अल्लाह अता कर दो मुझे इस्लाम की तब्लीग़ का जज़्बा मैं बस देता फिरूँ नेकी की दावत या रसूल अल्लाह यक़ीनन आप का इनाम है ये मिल गए मुझ को शहंशाहे-बरेली आला हज़रत या रसूल अल्लाह