Home/Muhammad Ilyas Attar Qadri/Attar ne darbar mein daaman hai pasara

Attar ne darbar mein daaman hai pasara

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

100%
अत्तार ने दरबार में दामन है पसारा है इज़्न-ए-मदीना का तलबगार बेचारा चमका दो शहा! मेरे मुक़द्दर का सितारा फिर हज्ज का शरफ़ मुझ को अता कर दो ख़ुदाया मैं साल-ए-गुज़िश्ता भी तो आया था मदीने इस साल भी हो जाए मदीने का नज़ारा मक्के की हसीन शाम की देखूँ मैं बहारें फिर देखूँ मदीने की शब-ए-आज दिल आरा सामान-ए-मदीना, तो शहा! ला के रखा है अब दे दो सफ़र का भी हमें इज़्न-ए-ख़ुदारा मायूस नहीं तुम से ये दीवाने तुम्हारे अब कर दो करम तुम न करो देर ख़ुदारा ताख़ीर हुई जाती है क्यों कूच में आख़िर? तशवीश में तय्यबा का मुसाफ़िर है बेचारा बिगड़ा हुआ हर काम संवर जाएगा मेरा कर देंगे शहा! आप जो अबरू का इशारा सरकार! मदीने में इसी साल बुला लो ऐ शाह! बड़ी आस है तुम को पुकारा या रब हमें मक्के की फ़ज़ाओं में बुला ले फिर ख़ाना-ए-काबा का करें जम के नज़ारा हो जाए मेरी हाज़िरी अरफ़ात-ओ-मिना में और मरवा-ओ-ज़ुलहज्ज का भी करूँ ख़ूब नज़ारा जो हिज्र-ए-मदीना में तड़पते हैं शब-ओ-रोज़ कर लें कभी तय्यबा का शहा! वो भी नज़ारा किस तरह मदीने में मेरा दाख़िला होगा आलूदा-ओ-वजूद आह! गुनाहों से है सारा ऐ काश! मेरी आँख हो दीदार के क़ाबिल जी भर के करूँ गुम्बद-ए-ख़ज़रा का नज़ारा मरने दो मदीने में मुझे क़ाफ़िले वालो ऐ चारागरो! तुम भी न करना कोई चारा हम जाएँ कहाँ और शहा किस को पुकारें हमदर्द नहीं तेरे सिवा कोई हमारा दुखियों का नहीं तेरे सिवा कोई भी हमदम है किस को ग़र्ज़ दूर करे दर्द हमारा गो बद हूँ गुनहगार हूँ बदकार बुरा हूँ जैसा भी हूँ सरकार तुम्हारा हूँ तुम्हारा हम क्यों करें हुक्काम की अमरा की ख़ुशामद जब आप के टुकड़ों पे हमारा है गुज़ारा शैतान ने बहका के गुनाहों में फँसाया और नफ़्स-ए-बद अतवार ने इसयां पे उभारा इसयां के समंदर में फँसी नाओ हमारी तुम आ के संभालो है बहुत दूर किनारा अफ़सोस! गुनाहों से है पुर नामा-ए-आमाल रखेगा मेरी लाज क़यामत में ख़ुदाया अत्तार का बस आप के हाथों में भरम है कह दीजिये अत्तार हमारा है हमारा