औलिया का करम

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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औलिया का करम, तुम पे हो लाजरम ख़ूब जलवे मिलें, क़ाफ़िले में चलो ख़्वाब में डर लगे, बोझ दिल पर लगे आइए चल पड़ें, क़ाफ़िले में चलो ग़ैबी इमदाद हो, घर भी आबाद हो लुत्फ़-ए-हक़ देख लें, क़ाफ़िले में चलो तंगदस्ती मिटे, दूर आफ़त है लेने को बरकतें, क़ाफ़िले में चलो बे-अमल बन गए ख़ास कर, आप भी देख लें, क़ाफ़िले में चलो ख़ूब होगा सवाब और टलेगा अज़ाब पाओगे बख़्शिशें, क़ाफ़िले में चलो बे-शक आमाल-ए-बद और अफ़ाल-ए-बद की छटें आदतें, क़ाफ़िले में चलो कर सफ़र आएंगे, तो सुधर जाएंगे अब न सुस्ती करें, क़ाफ़िले में चलो दिल पे ज़ंग हो, सारा घर तंग हो दाग़ सारे धुलें, क़ाफ़िले में चलो ऐसा फ़ैज़ान हो, हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन हो ख़ूब ख़ुशियां मिलें, क़ाफ़िले में चलो आशिक़-ए-क़ाफ़िला बन के घर लो बना क़ल्ब-ए-अत्तार में क़ाफ़िले में चलो