ब-हम्द-ए-अल्लाह अब्दुल्लाह का नूर-ए-नज़र आया
मुबारक आमना का नूर-ए-दिल लख़्त-ए-जिगर आया
ये अब्दुल मुत्तलिब की ख़ूबी-ए-क़िस्मत कि उन के घर
चिराग़-ए-ला-मकाँ कौन-ओ-मकाँ का ताजवर आया
वो ख़त्म-उल-अम्बिया तशरीफ़ फ़र्मा होने वाले हैं
नबी हर एक पहले से सुनाता ये ख़बर आया
रबी-उल-पाक तुझ पे अहले-सुन्नत क्यों न क़ुर्बान हों
कि तेरी बारहवीं तारीख़ वो जान-ए-क़मर आया
हुए जब जलवा फ़र्मा शाह-ए-ज़ीशान दुनिया में
हर एक क़ुदसी फ़लक से बहर-ए-पा-बोसी उतर आया
झुका जाता है सजदे के लिए इस वास्ते काबा
कि मस्जूद-ए-मलाइका आज इस में जलवा-गर आया