बाद रमज़ान ईद होती है
रब्ब की रहमत मज़ीद होती है
जिस को आक़ा की दीद होती है
उस पे क़ुर्बान ”ईद“ होती है
ईद तुझ को मुबारक ऐ साइम!
रोज़ादारों की ईद होती है
रोज़ा खुरो! ख़ुदा की नाराज़ी
सुन लो! तुम पर शदीद होती है
तेरी शैतां! माहे रमज़ान में
कैसी मिट्टी पलीद होती है!
रोज़ादारों के वास्ते वल्लाह
मफ़िरत की नवीद होती है
ईद के दिन उमर ये रो रो कर
बोले: ”नेकिकों की ईद होती है“
जो कोई रब्ब को करते हैं नाराज़
उन से रहमत बईद होती है
फ़िल्म बीनों के हक़ में लो ये
ईद, यौमे वईद होती है
बे नमाज़ों की रोज़ा खोरों की
कौन कहता है ईद होती है!
जिस को आक़ा मदीने बुलवाएं
उस मुसलमां की ईद होती है
मुझ को ”ईदी“ में दो बक़ी आक़ा
जाने कब मेरी ईद होती है!
जो बिछड़ जाए उन की गलियों से
क्या भला उस की ईद होती है!
ईद अत्तार उस की है जिस को
ख़्वाब में उन की दीद होती है