बयां किस मुंह से हो उस मज्म-उल-बहदैन का रुतबा
जो मरकज़ है शरीयत का तरीक़त का है सरचश्मा
बना उस वास्ते अल्लाह का घर जाए पैदाइश
के वो इस्लाम का काबा है ये ईमान का काबा
वो है खामोश क़ुरआन और ये क़ुरआन-ए-नातिक हैं
नहीं है जिस दिल में ये उस में क़ुरआन का रस्ता
दुल्हन-ए-ज़हरा उमर दामाद और हसनैन से बेटे
तेरी हस्ती है आला और बालातर तेरा कुनबा