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Bashar woh hai jis ko teri justuju hai

Written by Mufti Ahmad Yar Khan Naeemi

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बशर वो है जिस को तेरी जुस्तजू है वही लब है जिस पर तेरी गुफ़्तगू है तेरी याद आबादी-ए-ख़ाना-ए-दिल दिलों की तमन्ना तेरी आरज़ू है उसे एक अल्लाह ने एक बनाया वो हर वस्फ़ में ला-शरीक लहु है मैं वो सग नहीं हूँ बहुत दर हूँ जिस के मैं वो सग हूँ जिस का फ़क़त एक तू है नमाज़ ओ अज़ां कलमा ओ ज़िक्र ओ ख़ुत्बा ये सब फूल हैं उन का तो रंग ओ बू है तुम्हारी ये सलामी नमाज़ों में दाख़िल तसव्वुर तेरा शर्ते मिस्ले वज़ू है तुम्हारी इताअत ख़ुदा की इबादत तेरा तज़किरा ज़िक्र-ए-हक़ हू-ब-हू है दम-ए-नज़अ सालिक का सर हो तेरा दर यही दिल की हसरत यही आरज़ू है