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भरे इस में असरार-ओ-इल्म-ए-दो आलम

Written by Maulana Muhammad Jamil-ur-Rehman Razvi

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भरे इस में असरार-ओ-इल्म-ए-दो आलम कुशादा किया हक़ ने सीना तुम्हारा ब-हुक्म-ए-ख़ुदा तुम हो मौजूद हर जा बज़ाहिर है तय्यबा ठिकाना तुम्हारा तुम्हारी सिफ़त-ए-हक़ ने फ़रमाई शाहिद हर एक जा है मौजूद जलवा तुम्हारा किसी जा है ताहा-ओ-यासीन कहीं पर क़ब है सिराजम-मुनीरा तुम्हारा जिसे हक़ के दीदार की आरज़ू हो वो देखे मेरी जान चेहरा तुम्हारा ख़ुदा हम को बख़्शे वो चश्म-ए-ख़ुदा बीन रहे कुछ न पर्दा हमारा तुम्हारा किया तुम को नूर-ए-मुजस्सम ख़ुदा ने ज़मीं पर नहीं पड़ता साया तुम्हारा कमालों का मख़्ज़न जमाल ओं का गुलशन ख़ुदा ने बनाया घराना तुम्हारा