दस्त-ए-क़ुदरत ने अजब सूरत बनाई आप की
वालह-ओ-शैदा हुई सारी ख़ुदाई आप की
आप पर सदक़े न क्यों कर हों हसीनान-ए-जहाँ
साने-ए-मुतलक़ को शक्ल-ए-पाक भाई आप की
आप महबूब-ए-ख़ुदा कौनैन के मुख़्तार हैं
जब ख़ुदा है आप का सारी ख़ुदाई आप की
बादशाहान-ए-जहाँ को भी यही कहते सुना
सल्तनत-ए-दुनिया की छोड़ो लो गदाई आप की
नार वाले एक दम में नूर वाले हो गए
रहमत-ए-आलम अजब है रहनुमाई आप की