Home/Maulana Muhammad Jamil-ur-Rehman Razvi/Dil mein ho mere jaaye Muhammad

दिल में हो मेरे जाए मुहम्मद

Written by Maulana Muhammad Jamil-ur-Rehman Razvi

100%
दिल में हो मेरे जाए मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) सर में रहे सौदा-ए-मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) फ़र्श की ज़ीनत रौनक़-ए-जन्नत बाइस-ए-ख़िलक़त मज़हर-ए-वहदत अर्श की इज़्ज़त पाए मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तूर पे पहुँचे हज़रत-ए-मूसा चौथे फ़लक पर हज़रत-ए-ईसा अर्श-ए-मुअल्ला जाए मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) क़िबला-ए-काअबा रौज़ा वाला अर्श से आला क़ब्र-ए-मुअल्ला जान-ए-जहाँ है सहरा-ए-मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) जिन्न-ओ-मलाइका हूर-ओ-ग़िलमाँ सब हैं नाम उन पे क़ुर्बान कौन नहीं जो आए मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) हक़ ने उन्हें बे-मिस्ल बनाया ज़मीन पर क्यों कर साया नूर-ए-ख़ुदा आअज़ा-ए-मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) जब कि फ़रिश्ते क़ब्र में आएँ ज़िक्र-ए-सवाल का लब पर लाएँ मैं ये कहूँ शैदा-ए-मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)