Home/Maulana Muhammad Jamil-ur-Rehman Razvi/Do-Aalam Mein Roshan Hai Akka Tumhara

दो आलम में रोशन है आका तुम्हारा

Written by Maulana Muhammad Jamil-ur-Rehman Razvi

100%
दो आलम में रोशन है आका तुम्हारा हुआ ला-मकां तक उजाला तुम्हारा न क्यों गाए बुलबुल तराना तुम्हारा कि पाती है हर गुल में जलवा तुम्हारा ज़मीं वाले क्या जानें रुतबा तुम्हारा है ऊँचा फ़लक से फहेरेरा तुम्हारा पढ़ा बे-ज़बानों ने कलमा तुम्हारा है संग-ओ-शजर में भी चर्चा तुम्हारा छुड़ाएगा ग़म से इशारा तुम्हारा उतारेगा पुल से सहारा तुम्हारा तुम्हें हो जवाब-ए-सवालात-ए-महशर तुम्हें को पुकारेगा बंदा तुम्हारा फ़-तरज़ा की यह प्यारी प्यारी सदा है कि होगा क़यामत में चाहा तुम्हारा