ईद-ए-मीलाद उन्नबी फिर आ गई, शुक्र का सजदा अदा फरमाइए
ईद आई ईद, ईदों की भी ईद, उठिए सामां जश्न का फरमाइए
झूम कर सारे ख़ुशी से बार बार, "मरहबा या मुस्तफ़ा" फरमाइए
"या रसूल अल्लाह" कहते ज़ोर से, शक़-ए-जिगर इबलीस का फरमाइए
Gुंबद-ए-ख़ज़रा के जलवे हों नसीब, ये करम या मुस्तफ़ा फरमाइए
दीजिए दर्द-ए-मदीना दीजिए, ये करम या मुस्तफ़ा फरमाइए
मेरा सीना हो मदीना या नबी, ये करम या मुस्तफ़ा फरमाइए
दीजिए सोज़-ए-रज़ा सोज़-ए-ज़िया, ये करम या मुस्तफ़ा फरमाइए
नेअमत-ए-अख़लाक़ कर दीजिए अता, ये करम या मुस्तफ़ा फरमाइए
ग़ीबत-ओ-चु़गली की आफ़त से बचें, ये करम या मुस्तफ़ा फरमाइए
हम रियाकारी से बचते ही रहें, ये करम या मुस्तफ़ा फरमाइए
नफ़्स-ओ-शैतां की शरारत दूर हो, ये करम या मुस्तफ़ा फरमाइए
दम लबों पर आ गया अत्तार का, अब क़दम रंजा शहा! फरमाइए