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है दिल को तेरी जुस्तजू गौस-ए-आज़म

Written by Maulana Muhammad Jamil-ur-Rehman Razvi

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है दिल को तेरी जुस्तजू गौस-ए-आज़म ज़बां पर तेरी गुफ़्तगू गौस-ए-आज़म तेरा ज़िक्र गुलशन में बुलबुल के लब पर गुलों में तेरा रंग-ओ-बू गौस-ए-आज़म नज़र में कोई ख़ूबरू क्या समाए बसा मेरी आँखों में तू गौस-ए-आज़म हैं सूरज अगर मुस्तफ़ा चांद है तू हैं जलवे तेरे चार सू गौस-ए-आज़म लगा ज़ख़्म तेग़-ए-मआसी का दिल पर तो रहमत से कर दे रफ़ू गौस-ए-आज़म मदद कर मैं हूँ नातवां और तन्हा हैं आअदा बहुत जंगजू गौस-ए-आज़म