है शहद से भी मीठा सरकार का मदीना
क्या ख़ूब महका महका सरकार का मदीना
हम को पसंद आया सरकार का मदीना
क्यों हो न अपना नारा ”सरकार का मदीना“
हर शहर से है अच्छा सरकार का मदीना
जन्नत से भी सुहाना सरकार का मदीना
बे-कस का है सहारा सरकार का मदीना
बे-घर का है ठिकाना सरकार का मदीना
कुहसार-ए-दिलकुशा हैं सहरा भी दिलरुबा हैं
हुस्न ओ जमाल वाला सरकार का मदीना
दोनों जहां से प्यारा, कौन-ओ-मकां से प्यारा
हर आँख का है तारा सरकार का मदीना
जन्नत का हुस्न सारा इस में सिमट कर आया
है हुस्न ही सरापा सरकार का मदीना
हर सम्त रहमतों की बरसात हो रही है
है रहमतों का दरिया सरकार का मदीना
फ़ुरक़त की आग में जो दिल को जला रहे हैं
उन को दिखा खुदारा सरकार का मदीना
ऐ ज़ायर-ए-मदीना! दिल को संभाल लेना!
देख आ गया मदीना सरकार का मदीना
”पिरस“ पे मरनीवाले! ”पिरस“ को भूल जाता
तू भी जो देख लेता सरकार का मदीना
है लाख लाख मौला हर आन शुक्र तेरा
एक बार फिर दिखाया सरकार का मदीना
फूलों को चूमता हूँ, कांटों को चूमता हूँ
लगता है मुझ को प्यारा सरकार का मदीना
जी चाहता है मेरा हर शय यहाँ की चूमूं
कैसा है मीठा मीठा सरकार का मदीना
मेरी नज़र को भाए दुनिया का हुस्न कैसे?
आंखों में है समाया सरकार का मदीना
अल्लाह! मुस्तफ़ा के क़दमों में मौत देदे
मदफ़न बने हमारा सरकार का मदीना
अत्तार की दुआ है तक़दीर में ख़ुदाया
लिख दे फ़क़त मदीना सरकार का मदीना