है ज़िक्रे मेरे लब पर हर सुब्हो शाम तेरा
मैं क्या हूँ सारी ख़िल्क़त लेती है नाम तेरा
हर चीज़ का तू नाज़िर और हर मकां में हाज़िर
ज़ाहिर में है अगरचे तैयबा मक़ाम तेरा
हर आँख देखती है तेरे ही रुख़ का जलवा
हर कान सुन रहा है प्यारे कलाम तेरा
तू नाइबे खुदा है महबूबे किब्रिया है
है मुल्क में खुदा के जारी निज़ाम तेरा
मालिक तुझे बनाया मख़्लूक़ का खुदा ने
इस वास्ते लिखा है हर शय पे नाम तेरा
तेरे खुदा ने तुझ को क़ुदरत हर एक अता की
इक मोजिज़ा है प्यारे युहयल इज़ाम तेरा