Home/Muhammad Ilyas Attar Qadri/Hamare haal-e-dil se tum to waqif

Hamare haal-e-dil se tum to waqif

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

100%
हमारे हाले दिल से तुम तो वाक़िफ़ ख़ुदावंदे-दो आलम की क़सम हो अंधेरा लहद में है आह! छाया मेरे नूरे-ख़ुदा चश्मे-करम हो इसे क्या ख़ौफ़े-महशर हो कि जिस का तेरे दस्ते-शफ़ाअत में भरम हो मिटा सकता नहीं कोई भी इस को कि हामी जिस का ख़ुद शाहे-उमम हो ग़मे-महबूब में रोती रहे जो मुझे या रब अता वो चश्मे-नम हो शहा जितने भी दीवाने हैं तेरे किसी का जज़्बा-ए-उल्फ़त न कम हो जो तुम चाहो यक़ीनन दूर मुझ से शहा उक़बा का हर रंज-ओ-अलम हो करे आँखों से सैले-अश्क जारी अता हिज्रे-मदीना का वो ग़म हो सदा करता रहूँ सुन्नत की खिदमत मरा जज़्बा किसी सूरत न कम हो करें इस्लामी बहनें शरई पर्दा अता उन को हया शाहे-उमम हो दिखा दो सब्ज़ गुंबद की बहारें शहा अत्तार पर अब तो करम हो मदीना