हर दम हो मेरा विर्द-ए-मदीना ही मदीना, बन जाये मेरा दिल तेरी उल्फ़त का ख़ज़ीना
वह लम्हा वह दिन और वह आ जाये महीना, फिर काश! तड़पता हुआ पहुँचूँ मैं मदीना
तैयबा में बुला कर मुझे सुल्तान-ए-मदीना, दीदार की ख़ातिर हो अता आँख भी बीना
सीना हो मदीना तो मदीना बने सीना, और याद तेरी दिल में रहे शाह-ए-मदीना
आ जाये मुझे काश! शहंशाह-ए-मदीना, रोने का तड़पने का फिर आये क़रीना
इस्यान के तलातुम में फँसा मेरा सफ़ीना, डूबा मैं सम्भालो! मुझे सरकार-ए-मदीना
ऐ नूर-ए-ख़ुदा! नूर भरी दिल पे नज़र हो, हो नूर से पुर तू यह बे-नूर नगीना
सरकार! तमन्ना है यूँही उम्र बसर हो, मरना तेरी उल्फ़त में तेरी याद में जीना
ग़मगीन तेरे ग़म में रहूँ काश! हमेशा, रोती रहें आँखें तो सुलगता रहे सीना
साक़ी! मुझे जाम-ए-मोहब्बत का पिला दो, उतरे न नशा इस का कभी शाह-ए-मदीना
तुम ख़ाक-ए-मदीना मेरे लाशे पे छिड़कना, फिर मिलना कफ़न पर जो मिले उन का पसीना
अत्तार तलबगार है बस नज़र-ए-करम का, लिल्लाहे करम, जान-ए-करम, बहर-ए-मदीना