Home/Maulana Muhammad Jamil-ur-Rehman Razvi/Har Shay Mein Hai Noor-e-Rukh-e-Taban-e-Muhammad

हर शय में है नूर-ए-रुख़-ए-ताबान-ए-मुहम्मद

Written by Maulana Muhammad Jamil-ur-Rehman Razvi

100%
हर शय में है नूर-ए-रुख़-ए-ताबान-ए-मुहम्मद हर फूल में ख़ुशबू-ए-गुलिस्तान-ए-मुहम्मद अल्लाह ने महबूब को बे-मिसल बनाया मुमकिन ही नहीं हो कोई हम-शआन-ए-मुहम्मद मख़्लूक को मालूम हो क्या उन की हक़ीक़त रब अज़्ज़वजल जानता है शआन-ए-मुहम्मद आसकता है कब हम से गँवारों को अदब वो जैसा कि अदब करते थे यारान-ए-मुहम्मद सीना है वही जिस में नबी की हो मोहब्बत है आंख वही जो है जोयान-ए-मुहम्मद वो दिल ही नहीं जो न झुके सू-ए-मदीना वो सर ही नहीं जो न हो क़ुर्बान-ए-मुहम्मद अअदा की शक़ावत कि हुए आप के मुनकिर और संग-ओ-शजर ताबे-ए-फ़रमान-ए-मुहम्मद