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हो मुबारक अहल-ए-ईमां ईद-ए-मिलाद-उन-नबी

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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हो मुबारक अहल-ए-ईमां ईद-ए-मिलाद-उन-नबी हो गई क़िस्मत दरख़्शां ईद-ए-मिलाद-उन-नबी ख़ूब ख़ुश हैं हूर ओ ग़ुल्मां ईद-ए-मिलाद-उन-नबी हर मलक मसरूर ओ शादां ईद-ए-मिलाद-उन-नबी चार सू हैं क्या छमा छम रहमतों की बारिशें झूमते हैं अब्र-ए-बारां ईद-ए-मिलाद-उन-नबी नूर की फुहार बरसी चार सू है रोशनी हो गया घर घर चराग़ां ईद-ए-मिलाद-उन-नबी चार जानिब धूम है सरकार के मिलाद की झूमता है हर मुसलमां ईद-ए-मिलाद-उन-नबी अर्श पर चारों तरफ़ सल्ल-ए-अला की धूम है आगये हैं नूर-ए-यज़दां ईद-ए-मिलाद-उन-नबी ग़ुंचे चटके, फूल महके हर तरफ़ आई बहार हो गई सुब्ह-ए-बहारां ईद-ए-मिलाद-उन-नबी जानते हो क्यों है रौशन आसमां पर कहकशां है क्या हक़ ने चराग़ां ईद-ए-मिलाद-उन-नबी हम न क्यों रौशन करें घर घर दिये मिलाद के ख़ुद करे हक़ चराग़ां ईद-ए-मिलाद-उन-नबी ईद-ए-मिलाद-उन-नबी तो ईद की भी ईद है ब-यक़ीन है ईद-ए-ईदां ईद-ए-मिलाद-उन-नबी ईद-ए-मिलाद-उन-नबी पर जो भी करता है ख़ुशी उस पे घुराता है शैतान ईद-ए-मिलाद-उन-नबी आमना के घर मुहम्मद (स.) की विलादत हो गई ख़ूब झूमो अहल-ए-ईमां ईद-ए-मिलाद-उन-नबी आओ दीवानो! चलो सब आमना के घर चलें नूर से भर लाएं दामां ईद-ए-मिलाद-उन-नबी ख़ूब झूमो ऐ गुनहगारो! तुम्हारी ईद है हो गया बख़्शिश का सामां ईद-ए-मिलाद-उन-नबी ग़म के मारो! बे-सहारा! बस तुम्हारी ईद है हो गया राहत का सामां ईद-ए-मिलाद-उन-नबी बे-क़रारो! दिलफ़गारो! बस तुम्हारी ईद है क्यों हो हैरां ओ परेशान ईद-ए-मिलाद-उन-नबी ग़म-नसीबो! अब ग़मों का दूर अंधेरा हो गया तुम मनाओ ख़ूब ख़ुशियां ईद-ए-मिलाद-उन-नबी खुल उठे मुरझाए दिल और जान में जान आ गई आगये हैं जान-ए-जानां ईद-ए-मिलाद-उन-नबी बे-कसों के दिन फिरे और ग़म के मारे हंस पड़े हो गया ख़ुशियों का सामां ईद-ए-मिलाद-उन-नबी इन्शा अल्लाह आज ईदी में मिलेगी मग़फ़िरत है जबी शैतान परेशान ईद-ए-मिलाद-उन-नबी या नबी! अपनी विलादत की ख़ुशी में ग़म दीजिये तैबा के सुलतान ईद-ए-मिलाद-उन-नबी ईद-ए-मिलाद-उन-नबी का वास्ता अत्तार को बख़्श दे ऐ रब-ए-रहमां ईद-ए-मिलाद-उन-नबी