हम को अल्लाह और नबी से प्यार है
इन्शा अल्लाह अपना बेड़ा पार है
उम्माहतुल मोमिनीन व चार यार
सब सहाबा से हमें तो प्यार है
गौस व ख़्वाजा दाता और अहमद रज़ा
से भी और हर इक वली से प्यार है
”या रसूल अल्लाह उन्ज़ुर हालना“
तालिव-ए-नज़्र-ए-करम बदकार है
”या हबीब अल्लाह इस्मा’ कालना“
इल्तिजा या सय्यदल अबरार है
”इन्ननी फ़ी बहरी हम्मिम मुग़्रक़ुन“
नाओ डांवा डोल दर-ए-मंजधार है
”खुज़ यदी सहिल लना अशकालना“
नाख़ुदा आओ तो बेड़ा पार है
हो अदु गारत वसीला उस का जो
जान-ए-आलम! तेरा यार-ए-गार है
दुश्मनों की जो उड़ा दे गर्दनें
या उमर! दरकार वो तलवार है
वास्ता उस्मान का आक़ा अल-मदद
दुश्मनों ने मुझ पे की यलग़ार है