Hum Pe Nazar-e-Karam Tajdar-e-Haram
Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri
हम पे नज़र-ए-करम, ताजदार-ए-हरम, नेक बन जाएं हम, ताजदार-ए-हरम
दर्द-ए-इसियाँ मिटे, आदत-ए-बद छूटे, शाह-ए-अरब-ओ-अजम, ताजदार-ए-हरम
नफ़्स-ओ-शैतान का, आह! ग़लबा हुआ, यानी हो करम, ताजदार-ए-हरम
यक्सां हों मदह-ओ-ज़म्म, मुझ को, कर दो करम, कुछ ख़ुशी हो न ग़म, ताजदार-ए-हरम
बद-कलामी न हो, यावा-गोई न हो, बोलूँ मैं कम से कम, ताजदार-ए-हरम
रखूँ नीची नज़रें, इधर या उधर, कुछ न देखूँ करम, ताजदार-ए-हरम
अश्क-बारी करूँ, आह-ओ-ज़ारी करूँ, हो निगाह-ए-करम, ताजदार-ए-हरम
इश्क़-ए-ख़ल्लाक़ दे, हुस्न-ए-अख़लाक़ दो, हो निगाह-ए-करम, ताजदार-ए-हरम
ख़ूब मुखलिस बनूँ, मैं रिया से बचूँ, हो निगाह-ए-करम, ताजदार-ए-हरम
आफ़तें जाएं टल, मुश्किलें भी हों हल, कर दो ऐसा करम, ताजदार-ए-हरम
हों दुरूद-ओ-सलाम, आक़ा लब पर मुदाम, हर घड़ी दम बदम, ताजदार-ए-हरम
बद-खसाएल टलें, सीधे रस्ते चलें, कर दो आक़ा करम, ताजदार-ए-हरम
हो गया गर अज़ाब, ऐ रिसालत माब, सह सकें गे न हम, ताजदार-ए-हरम
खुल्द की दो सनद, अज़ तुफ़ैल-ए-समद, या शफ़ी-ए-उमम, ताजदार-ए-हरम
रोज़-ए-महशर शहा! मुझ गुनहगार का, आप रखना भरम, ताजदार-ए-हरम
ज़ाहिर-ओ-बातिन एक, आक़ा हो कर दो नेक, या शफ़ी-ए-उमम, ताजदार-ए-हरम
अपना दीवाना कर, मस्त-ओ-मस्ताना कर, शहरयार-ए-इरम, ताजदार-ए-हरम
अब मदीने बुला, सब्ज़ गुम्बद दिखा, चूमूँ ख़ाक-ए-हरम, ताजदार-ए-हरम
सब्र-ओ-हिम्मत मिले, दिल को राहत मिले, कर दो ऐसा करम, ताजदार-ए-हरम
काश आए वो पल, रोते रोते निकल, जाए क़दमों में दम, ताजदार-ए-हरम
काश! होता शहा, जिस्म अत्तार का, ख़ाक-ए-तैयबा में ज़म, ताजदार-ए-हरम