इलाही दिखा दे जमाल-ए-मदीना, करम से हो पूरा सवाल-ए-मदीना
अता कीजिये हाज़िरी की सआदत, इनायत हो मुझ को विसाल-ए-मदीना
दिखा दे मुझे सब्ज़ गुम्बद के जलवे, दिखा मुझ को दश्त-ओ-जमाल-ए-मदीना
पहुँच कर मदीने में हो जाये मौला, मेरी जाँ फ़िदा-ए-जमाल-ए-मदीना
मुझे 'चल मदीना' का मज़दा सुनादो, करम या शह-ए-ख़ुश ख़िसाल-ए-मदीना
हूँ प्यारे नबी! ख़त्म-ए-लम्हात-ए-फ़ुरक़त, मयस्सर हो मुझ को विसाल-ए-मदीना
ग़म-ए-इश्क़-ए-सरवर ख़ुदाया अता कर, मुझे अज़ तुफ़ैल-ए-बिलाल-ए-मदीना
ख़ुदा-ए-मुहम्मद हमारे दिलों से, न निकले कभी ख़याल-ए-मदीना
सदा रहमतों की बरसती झड़ी है, मदीने में ये है कमाल-ए-मदीना
मुअत्तर मुअत्तर है सब से मुनव्वर, नहीं दो जहाँ में मिसाल-ए-मदीना
सभी पा रहे हैं उसी दर से मैं भी, हूँ उम्मीद-वार-ए-नवाल-ए-मदीना
क़दम चूम कर सर पे रख लेना अत्तार, नज़र आये गर नौ-निहाल-ए-मदीना