Home/Allama Hasan Raza Khan/Jaan balab hoon aamri jaan Al-Ghiyath

जाँ बलव हूँ आमरी जाँ अल-ग़ियास

Written by Allama Hasan Raza Khan

100%
जाँ बलव हूँ आ मेरी जाँ अल-ग़ियास होते हैं कुछ और सामाँ अल-ग़ियास दर्द मंदों को दवा मिलती नहीं ऐ दवा-ए-दर्द मंदां अल-ग़ियास जाँ से जाते हैं बेचारे ग़रीब चारा फ़र्माए ग़रीबां अल-ग़ियास हद से गुज़रें दर्द की बे-दर्दियां दर्द से बे-हद हूँ नालां अल-ग़ियास बे-क़रारी चैन लेती ही नहीं ऐ क़रार-ए-बे-क़रारां अल-ग़ियास हसरतें दिल में बहुत बे-चैन हैं घर हुआ जाता है ज़िंदां अल-ग़ियास ख़ाक है पामाल मेरी गो बुगो ऐ हवा-ए-गोये जानां अल-ग़ियास अल-मदद ऐ ज़ुल्फ़-ए-सरवर अल-मदद हूँ बलाओं में परेशां अल-ग़ियास दिल की उलझन दूर कर गेसू-ए-पाक ऐ करम के सुम्बुलां अल-ग़ियास ऐ सर-ए-पुरनूर ऐ रहबर-ए-ख़ुदा हूँ सरासीमा परेशां अल-ग़ियास ग़मज़दों की शाम है तारीक रात ऐ जबीं ऐ माह-ए-ताबान अल-ग़ियास अबरू-ए-शाह काट दे ज़ंजीर-ए-ग़म तेरे सदक़े तेरे क़ुरबां अल-ग़ियास दिल के हर पहलू में ग़म की फांस है मैं फ़िदा मिज़गान-ए-जानां अल-ग़ियास चश्म-ए-रहमत आ गया आँखों में दम देख हाल-ए-ख़स्ता हालां अल-ग़ियास मुर्दन-ए-ऐ मेहर-ए-नूर-ए-ज़ात-ए-बख़्त हैं सियह बख़्ती के सामाँ अल-ग़ियास तीर-ए-ग़म के दिल में छेद कर रह गए ऐ निगाह-ए-मेहर-ए-जानां अल-ग़ियास ऐ करम की कान ऐ गोश-ए-हुज़ूर सुन ले फ़र्याद-ए-ग़रीबां अल-ग़ियास आरिज़-ए-रंगीं ख़िज़ां को दूर कर ऐ जनां आरा गुलिस्तां अल-ग़ियास बेनी पुरनूर हाल-ए-माह-ए-बह हैं नाक में दम है मेरी जाँ अल-ग़ियास जाँ बलव हूँ जाँ बलव पर रहम कर ऐ लब ऐ ईसा-ए-दौरां अल-ग़ियास ऐ तबस्सुम ग़ुंचा-ए-दिल की जाँ खेल चलें मुरझाई कलियां अल-ग़ियास ऐ दहन ऐ चश्मा-ए-आब-ए-हयात मर मिटे दे आब-ए-हयवां अल-ग़ियास दुर-ए-मक़सद के लिए हूँ ग़र्क़-ए-ग़म गौहर-ए-शादाब दंदां अल-ग़ियास ए अमामा दु-ए गर्दिश दूर कर गर्द फिर फिर हूँ क़ुर्बान अल-ग़ियास नीचे नीचे दामनों वाली अबा ख़्वार है ख़ाक-ए-ग़रीबाँ अल-ग़ियास पड़ गई शाम-ए-अलम मेरे गले जलवा-ए-सुब्ह-ए-ग़रीबाँ अल-ग़ियास खोल मुश्किल की गिरह बंद-ए-क़बा बंद-ए-ग़म में हूँ परेशाँ अल-ग़ियास आस्तीं नक़द-ए-अता दर आस्तीं बे-नवा हैं अश्क रेज़ाँ अल-ग़ियास चाक ऐ चाक-ए-जिगर के बखिया-गर दिल है ग़म से चाक जानाँ अल-ग़ियास ऐब खुलते हैं गदा के रोज़-ए-हश्र दामन-ए-सुल्तान-ए-ख़ूबाँ अल-ग़ियास दौर-ए-दामन दौर दौरा है तेरा दूर कर दूरी का दौराँ अल-ग़ियास हूँ फ़ुसुर्दा खातिर ऐ गुलगूँ क़बा दिल खुला दें तेरी कलियाँ अल-ग़ियास दिल है टुकड़े टुकड़े पैवंद-ए-लिबास ऐ पनाह-ए-खस्ताहालाँ अल-ग़ियास है फटे हालों मेरा रख्त-ए-अमल ऐ लिबास-ए-पाक-ए-जाँ अल-ग़ियास नअल-ए-शह इज़्ज़त है मेरी तेरे हाथ ऐ वक़ार-ए-ताज-ए-शाहाँ अल-ग़ियास ऐ शरक नअल-ए-पाक-ए-मुस्तफ़ा ज़ेर-ए-निशतर है रग-ए-जाँ अल-ग़ियास शाना-ए-शह दिल है ग़म से चाक चाक ऐ अनीस-ए-सीना चाकाँ अल-ग़ियास सुरमा ऐ चश्म-ओ-चिराग़-ए-कोह-ए-तूर है सियह शाम-ए-ग़रीबाँ अल-ग़ियास टूटा है दम में डोरा साँस का रेशा-ए-मिस्वाक-ए-जानाँ अल-ग़ियास आईना ऐ मंज़िल-ए-अनवार-ए-क़ुद्स तीरा बख्ती से हूँ हैराँ अल-ग़ियास सख्त दुश्मन है हुस्न की ताक में अल-मदद महबूब-ए-यज़दाँ अल-ग़ियास खमीदा सर गिरफ्तार-ए-क़ज़ा है कशीदा खंजर-ए-जल्लाद या ग़ौस अंधेरी रात जंगल में अकेला मदद का वक़्त है फ़रियाद या ग़ौस खिला दो गुंचा-ए-खातिर कि तुम हो बहार-ए-गुलशन-ए-ईजाद या ग़ौस मेरे ग़म की कहानी आप सुन लें कहूँ मैं किस से यह रूदाद या ग़ौस रहूँ आज़ाद क़ैद-ए-इश्क़ कब तक करो उस क़ैद से आज़ाद या ग़ौस करोगे कब तक अच्छा मुझ बुरे को मेरे हक़ में है क्या इरशाद या ग़ौस ग़म-ए-दुनिया ग़म-ए-क़ब्र ओ ग़म-ए-हश्र ख़ुदारा कर दे मुझ को शाद या ग़ौस हस्सान माँगता है दे दे भीक दाता रहे यह राज़ पाट आबाद या ग़ौस