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काश! पहले मैं दफ़्न हो जाता

Written by Imam Ahmad Raza Khan Qadri

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दरबार-ए-रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिही वसल्लम के शायर हज़रत सय्यदुना हस्सान बिन साबित रदियल्लाहु तआला अन्हु अर्ज़ करते हैं: ऐ मेरे आक़ा! काश ऐसा होता कि मैं आप से पहले बक़ी-उल-ग़रक़द में दफ़्न हो जाता काश! मैं आज के दिन के लिए पैदा ही न हुआ होता, ख़ुदा की क़सम! जब तक मैं ज़िन्दा रहूँगा अपने महबूब आक़ा सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिही वसल्लम के लिए रोता और तड़पता रहूँगा।