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कैसे कौन-ओ-मकाँ रौशन तेरी तनवीर के क़ुर्बान

Written by Maulana Muhammad Jamil-ur-Rehman Razvi

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कैसे कौन-ओ-मकाँ रौशन तरी तनवीर के क़ुर्बान तू पहुँचा ला-मकाँ प्यारे तरी तौक़ीर के क़ुर्बान रुख़-ओ-ज़ुल्फ़-ए-नबी को देख कर कहता है आईना अरब के चाँद में भी हूँ तरी तनवीर के क़ुर्बान नबी की ख़ाक-ए-पा इक्सीर-ए-आज़म से भी बढ़ कर है मैं क्यों ऐ कीमियागर हूँ तरी इक्सीर के क़ुर्बान फ़सीहान-ए-अरब हैरान हो हो कर ये कहते थे रसूलुल्लाह की तक़रीर-ए-पुर-तनवीर के क़ुर्बान हज़ारों दुश्मनों को एक दम में कर लिया बंदा रसूलुल्लाह के ख़ुत्बे तरी तासीर के क़ुर्बान