कैसे कौन-ओ-मकाँ रौशन तरी तनवीर के क़ुर्बान
तू पहुँचा ला-मकाँ प्यारे तरी तौक़ीर के क़ुर्बान
रुख़-ओ-ज़ुल्फ़-ए-नबी को देख कर कहता है आईना
अरब के चाँद में भी हूँ तरी तनवीर के क़ुर्बान
नबी की ख़ाक-ए-पा इक्सीर-ए-आज़म से भी बढ़ कर है
मैं क्यों ऐ कीमियागर हूँ तरी इक्सीर के क़ुर्बान
फ़सीहान-ए-अरब हैरान हो हो कर ये कहते थे
रसूलुल्लाह की तक़रीर-ए-पुर-तनवीर के क़ुर्बान
हज़ारों दुश्मनों को एक दम में कर लिया बंदा
रसूलुल्लाह के ख़ुत्बे तरी तासीर के क़ुर्बान