अदना गोये सर-ए-तूर से पूछे कोई
किस तरह ग़श में गिराता है तजल्ली तेरा
पार उतरता है कोई ग़र्क़ कोई होता है
कहीं पायाब कहीं जोश में दरिया तेरा
बाग़ में फूल हुआ शमअ बना महफ़िल में
जोश-ए-नैरंग दर-ए-आग़ोश है जलवा तेरा
नए अंदाज़ की ख़लवत है ये ऐ पर्दा नशीं
आँखें मुश्ताक़ रहें दिल में हो जलवा तेरा
शाह नशीं टूटे हुए दिल को बनाया उस ने
आह ऐ दीदा-ए-मुश्ताक़ ये लिखा तेरा
सात पर्दों में नज़र और नज़र में आलम
कुछ समझ में नहीं आता ये मुअम्मा तेरा
तूर का ढेर हुआ ग़श में पड़े हैं मूसा
क्यों न हो यार कि जलवा है ये जलवा तेरा
चार-ए-अज़दाद की किस तरह गिरह बाँधी है
नाख़ुन-ए-अक़्ल से खुलता नहीं उक़दा तेरा