खूब भेजों के दीवानो! अदब से झूम कर
तुम मदीने के हसीं गुलज़ार पर लाखों सलाम
क़ब्र में लहराएंगे जिस वक़्त जलवा-ए-नूर के
हम पढ़ेंगे रू-ए-पुर-अनवार पर लाखों सलाम
ऐ मदीने के मुसाफ़िर! ले के जा मेरा पयाम
भेजना रो रो के तू सरकार पर लाखों सलाम
या नबी! जितने भी दीवाने यहाँ मौजूद हैं
काश! सब आकर पढ़ें दरबार पर लाखों सलाम
मेरे प्यारे पीर-ओ-मुर्शद सय्यदी ग़ौस-उल-वरा
औलिया-ए-अल्लाह के सरदार पर लाखों सलाम
जो गया अजमेर में दिल की मुरादें पा गया
मेरे ख़्वाजा के सख़ी दरबार पर लाखों सलाम
सय्यदी अहमद रज़ा ने खूब लिखा है कलाम
उन के सारे ना’तिया अशआर पर लाखों सलाम
हो चुके होंगे जहाँ में जिस क़द्र भी औलिया
उन पे, हर-एक उन के ख़िदमतगार पर लाखों सलाम
मग़फ़िरत कर ऐ ख़ुदा अत्तार बद-अतवार की
भेज या-रब उम्मत-ए-सरकार पर लाखों सलाम
मीठे मुर्शद ने बक़ी-ए-पाक में पाया मज़ार
सारे भेजो मुर्शद-ए-अत्तार पर लाखों सलाम