ख़ुदा के प्यारे नबी हमारे रऊफ़ भी हैं रहीम भी हैं
शफ़ीअ भी हैं रसूल भी हैं मुताअ भी हैं क़सीम भी हैं
उठाते तकलीफ़ें काफ़िरों से दुआ हिदायत की उन की करते
तमाम औसाफ़ में हैं यकता शकूर भी हैं हलीम भी हैं
ये ला-दवा है मरज़ हमारा तबीब क्यों करेंगे चारा
इलाज मेरा करेंगे आक़ा तबीब-ए-दिल हैं हकीम भी हैं
नहीं है कुछ अर्ज़ की ज़रूरत कि उन पे रौशन है सब की हालत
रसूल-ए-अकरम समीअ भी हैं बसीर भी हैं अलीम भी हैं
उन्हें के दर के हैं हम भिखारी उन्हें की ये नेमतें हैं सारी
उन्हें के हैं सलसबील ओ कौसर उन्हें के क़स्र-ए-नईम भी हैं
वो अर्श के ताजदार मौला सिफ़त है यासीन सुना है ताहा
ग़नी ओ मुअती है नाम उन का अरब के दुर-ए-यतीम भी हैं