ख़ुदा की ख़ल्क़ में सब अंबिया ख़ास
ग्रोह-ए-अंबिया में मुस्तफ़ा ख़ास
निराला हुस्न-ए-अंदाज़-ओ-अदा ख़ास
तुझे ख़ासों में हक़ ने कर लिया ख़ास
तरी नेमत के साएल ख़ास ता आम
तरी रहमत के तालिब आम ता ख़ास
शरीक इस में नहीं कोई पयंबर
ख़ुदा से है जो तुझ को वास्ता ख़ास
गुनाहगारो न हो मायूस-ए-रहमत
नहीं होती करीमों की अता ख़ास
गदा हूँ ख़ास रहमत से मिले भीक
न मैं ख़ास और न मेरी इल्तिजा ख़ास