Home/Imam Ahmad Raza Khan Qadri/Kis darja hai roshan tan-e-mehboob-e-Ilah

किस दर्जा है रौशन तन-ए-महबूब-ए-इलाह

Written by Imam Ahmad Raza Khan Qadri

100%
किस दर्जा है रौशन तन-ए-महबूब-ए-इलाह जामे से अयाँ रंग-ए-बदन है वल्लाह कपड़े ये नहीं मैले हैं इस गुल के रज़ा फ़रियाद को आई है सियाही गुनाह है जल्वागह-ए-नूर-ए-इलाही वो रू क़ौसैन की मानिंद हैं दोनों अबरू आँखें ये नहीं सब्ज़ा-ए-मिज़गाँ के क़रीब चरते हैं फ़ज़ा-ए-लामकाँ में आहू मअदूम न था साया-ए-शाह-ए-सक़लैन इस नूर की जल्वागह थी ज़ात-ए-हसनैन तिम्सील ने इस साया के दो हिस्से किए आधे से हसन बने आधे से हुसैन दुनिया में हर आफत से बचाना मौला उक़बा में न कुछ रंज दिखाना मौला बैठूँ जो दर-ए-पाक-ए-पैग़म्बर के हुज़ूर ईमान पर उस वक़्त उठाना मौला ख़ालिक़ के कमाल हैं तजद्दुद से बरी मख़लूक़ ने महदूद तबीयत पाई बिलजुमला वजूद में है इक ज़ात-ए-रसूल जिस की है हमेशा रोज़-अफ़ज़ूँ खूबी हूँ कर दो तो गर्दूँ की बिना गिर जाए अबरू जो खिंचे तेग़-ए-क़ज़ा कर जाए ऐ साहिब-ए-क़ौसैन बस अब रद न करे सह हूँ से तीर-ए-बला फिर जाए नुक़सान न दे गा तुझे इस्याँ मेरा गुफ़राँ में कुछ ख़र्च न हो गा तेरा जिस से तुझे नुक़सान नहीं कर दे माफ़ जिस में तेरा कुछ ख़र्च नहीं दे मौला