किस के दर पे मैं जाऊं गा मौला गर तू नाराज़ हो गया या रब
वक़्त-ए-रूहलत अब आ गया मौला जलवा-ए-मुस्तफ़ा दिखा या रब
क़ब्र में आह! घुप अंधेरा है रौशनी हो पये रज़ा या रब
सांप लिपटें न मेरे लाश से क़ब्र में कुछ न दे सज़ा या रब
नूर-ए-अहमद से क़ब्र रौशन हो वहशत-ए-क़ब्र से बचा या रब
हाये! हुस्न-ए-अमल नहीं पल्ले हश्र में मेरा हो क्या या रब
गर्मी-ए-हश्र, प्यास की शिद्दत जाम-ए-कौसर मुझे पिला या रब
ख़ौफ़-ए-दोज़ख़ का आह! रहमत हो ख़ाक-ए-तैयबा का वास्ता या रब
मेरा नाज़ुक बदन जहन्नम से अज़ तुफ़ैल-ए-रज़ा बचा या रब
तालिब-ए-मग़फ़िरत हूँ या अल्लाह बख़्शिश-ए-हैदर का वास्ता या रब
सब ने ठुकरा दिया तो क्या परवा मुझको तेरा है आसरा या रब
ज़ुल्फ़-ए-महबूब का बना क़ैदी और हरगिज़ न फिर छुड़ा या रब
मुश्किलों में दे सब्र की तौफ़ीक़ अपने ग़म में फ़क़त घुला या रब
दे दे सोज़-ए-बिलाल या अल्लाह अश्कबार आँख हो अता या रब
आह! ए'दा हैं ख़ून के प्यासे दुश्मनों से मुझे बचा या रब
दे शहादत मुझे मदीने में अज़ पये शाह-ए-करबला या रब
सब्ज़ गुम्बद के ज़ेर-ए-साया हो जां मेरी जिस्म से जुदा या रब
क़ब्र मेरी बने मदीने में तुझ से है ये मेरी दुआ या रब
हिस-ए-दुनिया निकाल दे दिल से बस रहूं तालिब-ए-रज़ा या रब
दे दे "क़ुफ़्ल-ए-मदीना" आँखों का वास्ता यार-ए-यार का या रब
दे दे "क़ुफ़्ल-ए-मदीना" लब का भी वास्ता यार-ए-यार का या रब
काश! आदत फ़ज़ूल बातों की दूर हो अज़ पये रज़ा या रब
वास्ता मेरे पीर-ओ-मुर्शद का मुझको तू मुत्तक़ी बना या रब
दिल का उजड़ा चमन हो फिर आबाद कोई ऐसी हवा चला या रब
हर बरस काश! आ के मक्के में लुत्फ़ उठाऊं तवाफ़ का या रब
जिस किसी ने कहा, दुआ करना, उस का पूरा हो मुद्दआ या रब
कर दे जन्नत में तू जवार उन का अपने अत्तार को अता या रब