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Kya Sabz Sabz Gumbad Ka Khoob Hai Nazara

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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क्या सब्ज़ सब्ज़ गुंबद का ख़ूब है नज़ारा है किस क़दर सुहाना कैसा है प्यारा प्यारा अनवारे-याँ छमा छम बरसाएं आठों याहम पुरनूर सब्ज़ गुंबद पुरनूर हर मीनारा पेशे-नज़र हो हर दम बस सब्ज़ गुंबद दिल में बसा रहे बस जलवा सदा तुम्हारा साए में सब्ज़ गुंबद के तोड़ने भी दो दम चारा गरो! ख़ुदारा कोई करो न चारा ग़ौसुल-वरा का सदक़ा ऐसा दे अपना ग़म बस रोते हुए ही गुज़रे सरकार! वक़्त सारा सीना बने मदीना दिल में बसे मदीना यादों में अपनी रखे गुम या नबी! ख़ुदारा मत छोड़िये मुझे अब दुनिया की ठोकरों पर बस आप ही के टुकड़ों पर हो मेरा गुज़ारा सरकार! हुब-ए-दुनिया दिल से मेरे निकालो दीवाना अब बनालो! अपना मुझे ख़ुदारा तड़पा करूँ सुदा में ए काश! तेरे ग़म में हाए! मुझे ज़माने के रंज-ओ-ग़म ने मारा गिरया गुनाही हूँ या रब! शौक़-ए-मदीना में जो तैबा का काश! वो भी कर लें गुमही नज़ारा रंज-ओ-अलम के बादल सारे ही छट गए हैं जब भी तड़प के हम ने सरकार को पुकारा ठुकरा दे जिस को दुनिया उस को गले लगाना ये काम है तुम्हारा या मुस्तफ़ा! तुम्हारा